Holi special: करीब 329 साल पुरानी एक घटना के चलते पुष्करणा समाज की इस जाति के लोग होली पर मनाते हैं शोक - Aapni Hathai - आपणी हथाई
Wednesday, January 14, 2026
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Holi special: करीब 329 साल पुरानी एक घटना के चलते पुष्करणा समाज की इस जाति के लोग होली पर मनाते हैं शोक

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आपणी हथाई न्यूज,  बीकानेर में इन दिनों होली के त्यौहार को लेकर पूरा शहर मस्ती के रंग में रंगा हुआ है लेकिन इस मस्ती के बीच बीकानेर के पुष्करणा समाज की एक जाति ऐसी भी है जो होली के दिनों में घर में सब्जी तक नहीं बनाते और ना ही होलिका दहन को देखते हैं और ना ही होली पर रंग गुलाल खरीदने हैं। बीकानेर में पुष्करणा समाज की जोशी जाति द्वारा होली पर शोक मनाया जाता है इसके पीछे करीब 329 साल पुरानी एक घटना है।

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विक्रम संवत् 1752 के फाल्गुन मास में होली के दिन समूचे पोकरण के माड़वा गांव में हरखाजी जोशी की पत्नी लालांदेवी अपने सबसे छोटे पुत्र भागचंद्र को गोद में लेकर होलिका दहन स्थल की पूजा के बाद परिक्रमा कर रही थी, तभी अचानक बालक भागचंद्र मां की गोद से छिटक कर जलती होली में जा गिरा। आनन-फानन में मां भी अपने पुत्र को बचाने के लिए होलिका में कूद गई। अचानक हुई इस घटना के बीच वहां मौजूद परिवारजन व ग्रामीणों ने उन्हें बचाने के प्रयास किए लेकिन उससे पहले ही मां-बेटे दोनों जलती होली में अपने प्राण त्याग दिए।

पूरे गांवमेंइस दुखद घटना के बाद संपूर्ण गांव में शोक व्याप्त हो गया। होली के उत्सव की खुशियां शोक में तकदीर हो गई। पूरे गांव में अगले दो दिन तक किसी भी परिवार में चूल्हा नहीं जला। आज भी 329 साल पुरानी इस दुखद घटना को याद किया जाता है और जोशी परिवार अपने घरों में होली के दिनों में छोंका नहीं लगाते हैं।

पोकरण के माड़वा गांव में सती माता के रूप में लालांदेवी व भागचंद्र का मंदिर बना हुआ है। ऐसी मान्यता है कि सती माता के दर्शन करने पर मनोकामना पूर्ण होती है।

यह लेख अलग-अलग लोगों द्वारा दी गई जानकारी व अन्य स्रोतों से जुटाई गई
जानकारी के आधार पर है।

 

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