
आपणी हथाई बीकाने न्यूज,विकास के नाम पर मरुस्थल के ‘कल्पवृक्ष’ खेजड़ी की बलि अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी—इस संकल्प के साथ आज बीकानेर की धरा एक ऐतिहासिक आंदोलन की गवाह बनी। पर्यावरण संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित ‘खेजड़ी बचाओ अभियान’ ने सोमवार को एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले लिया।
सौर ऊर्जा कंपनियों (Solar Companies) द्वारा प्रोजेक्ट्स के नाम पर लाखों खेजड़ी के पेड़ों की अवैध कटाई के विरोध में आज पूरा बीकानेर थम सा गया। हजारों की संख्या में पर्यावरण प्रेमी, बिश्नोई समाज के लोग और सर्वसमाज के नागरिक सड़कों पर उतर आए। हालात यह रहे कि प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
बाजार बंद, स्कूलों में आधे दिन की छुट्टी
आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीकानेर के प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने महापड़ाव के समर्थन में अपने प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रखे। केईएम रोड, सट्टा बाजार, गणपति प्लाजा और खजांची मार्केट जैसे व्यस्त इलाकों में सन्नाटा पसरा रहा। भीड़ और आंदोलन के व्यापक असर को देखते हुए जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को सरकारी और निजी स्कूलों में आधे दिन (लंच के बाद) का अवकाश घोषित करना पड़ा, ताकि स्कूली बच्चों को जाम या अव्यवस्था का सामना न करना पड़े।
सोलर कंपनियों पर गंभीर आरोप: “रात के अंधेरे में दफन हो रहे पेड़”
पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में आयोजित विशाल जनसभा में वक्ताओं ने सौर ऊर्जा कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए। आंदोलनकारियों का कहना है कि ‘ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर’ के नाम पर राजस्थान में अब तक करीब 50 लाख से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं, जिनमें से अकेले बीकानेर संभाग में यह आंकड़ा 20 लाख के पार है। आरोप है कि कंपनियां रात के अंधेरे में पेड़ काटकर सबूत मिटाने के लिए उन्हें वहीं जमीन में दफन कर रही हैं।
“आश्वासन नहीं, अब कानून चाहिए”
मुकाम पीठाधीश्वर स्वामी रामानंद महाराज और स्वामी सच्चिदानंद महाराज के सानिध्य में संतों ने सरकार को दो टूक चेतावनी दी है। स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने एक लाख से अधिक लोगों की भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, “सरकार जब तक लिखित में खेजड़ी संरक्षण के लिए कड़े कानून (Non-bailable warrant provisions) का मसौदा नहीं लाती, हम यहां से नहीं हिलेंगे।”
उन्होंने ऐलान किया कि महापड़ाव के साथ ही अब ‘आमरण अनशन’ भी शुरू हो गया है। जब तक पेड़ों पर चलने वाली कुल्हाड़ियां नहीं रुकतीं, तब तक अन्न-जल ग्रहण नहीं किया जाएगा।
विधायक और जनप्रतिनिधि भी हुए शामिल
इस आंदोलन को अब राजनीतिक धार भी मिल गई है। जनसभा में शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी, विधायक अभिमन्यु पूनिया और पूर्व मंत्री भंवर सिंह भाटी समेत कई दिग्गज नेता भी शामिल हुए। उन्होंने विधानसभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने और खेजड़ी कटाई को गैर-जमानती अपराध बनाने की मांग का समर्थन किया।
आगे क्या?
पॉलिटेक्निक कॉलेज से शुरू हुआ यह जनसैलाब अब बिश्नोई धर्मशाला के सामने अनिश्चितकालीन महापड़ाव में तब्दील हो चुका है। सरकार और प्रशासन पर भारी दबाव है, क्योंकि आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई अब ‘आर-पार’ की है।


