

Bikaner Cyber Fraud आपणी हथाई न्यूज, बीकानेर जिलें के श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को दो अलग-अलग मामलों में सफलता मिली है। एक कार्रवाई में साइबर ठगी के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले दो युवकों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दूसरे मामले में एक व्यापारी से 7 लाख 50 हजार रुपए की ऑनलाइन ठगी के आरोप में गुजरात निवासी दंपती के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है।
फ्रेंचाइजी के नाम पर ठगी
साइबर फ्रॉड रोकथाम अभियान के तहत श्रीडूंगरगढ़ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उदयरामसर निवासी अशोक कुमार (24) और बीरमसर निवासी धर्मपाल (28) को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे आर्थिक लाभ के लिए अपने बैंक खाते साइबर ठगों को उपलब्ध करवाते थे। इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था। मामले की जांच हेड कांस्टेबल उमर रम के नेतृत्व में की गई।
श्रीडूंगरगढ़ के एक व्यापारी से कुलचा क्राफ्ट की फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देकर 7 लाख 50 हजार रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। परिवादी प्रमोद कुमार पुत्र लीलाधर बोथरा ने पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया कि उसका भाई सूरत निवासी अशोक कुमार वहा व्यवस्या करता है।इस दौरान उसने गुजरात निवासी दंपती शेरे सौरभ राव और वैभवी राव ने फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर अलग अलग किश्तों में कैफे वर्धयन और इस्पास स्पेयर के खातों में रकम ली। आरोप है कि 26 मार्च से 14 मई 2026 के बीच अलग-अलग किस्तों में कुल 7.50 लाख रुपए आरोपी दंपती की फर्म के बैंक खातों में ऑनलाइन जमा करवाए गए।
पुलिस के अनुसार करीब 20 दिन पहले आरोपी दंपती की फर्म के बैंक खातों में रकम पहुंचने के बाद भी पीड़ित को फ्रेंचाइजी नहीं मिली। इसके बाद उसे ठगी का संदेह हुआ। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी दंपती गुजरात के मेहसाणा जिले में रहते हैं। ठगी की आशंका होने पर व्यापारी ने श्रीडूंगरगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
साइबर फ्रॉड के दो आरोपी गिरफ्तार
साइबर फ्रॉड रोकथाम अभियान के तहत श्रीडूंगरगढ़ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उदयरामसर निवासी अशोक कुमार (24) और बीरमसर निवासी धर्मपाल (28) को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि वे आर्थिक लाभ के लिए अपने बैंक खाते साइबर ठगों को उपलब्ध करवाते थे। इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था। मामले की जांच हेड कांस्टेबल उमर रम के नेतृत्व में की गई।



