
Bikaner आपणी हथाई न्यूज, बीकानेर के आसपास स्थित चार गोचर क्षेत्रों को एकीकृत कर करीब 40 हजार बीघा भूमि में गौ अभयारण्य विकसित करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। इस मांग को लेकर जुड़े संगठनों ने प्रशासन पर समझौते के बावजूद अब तक ठोस निर्णय नहीं लेने का आरोप लगाया है।

संगठनों का कहना है कि आंदोलन के बाद हुए समझौते में बीकानेर विकास प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहित गोचर भूमि को वापस करने और उसे गौ अभयारण्य के लिए सुरक्षित रखने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन समझौते को करीब छह महीने बीतने के बाद भी अभयारण्य को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

संगठन से जुड़े सूरजमाल सिंह नीमराना ने कहा कि प्रस्तावित गौ अभयारण्य बनने से निराश्रित गोवंश के संरक्षण के साथ क्षेत्र की जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित क्षेत्र में चारे, छाया और पानी की पर्याप्त संभावनाएं हैं। यहां जलस्रोत, नलकूप, तालाब और बड़े पेड़ भी मौजूद हैं। इसके अलावा कुछ हिस्सों में दीवार और तारबंदी होने से अभयारण्य के विकास में सुविधा मिल सकती है।
संयोजक शिव गहलोत और कैलाश सोलंकी ने कहा कि गोचर भूमि को गौ अभयारण्य के लिए सुरक्षित रखने की मांग लंबे समय से की जा रही है। यदि सरकार और प्रशासन ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो संगठन दोबारा आंदोलन शुरू करने को मजबूर होंगे।
इस दौरान मनोज कुमार सेवक, प्रेम सिंह राठौड़, सूरज प्रकाश राव, महेंद्र किराडू, यशवीर चौधरी सहित संगठन से जुड़े अन्य सदस्य मौजूद रहे।




