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Bikaner : कैंसर दवाओं के ‘ब्लैक कॉरिडोर’ का सच आया सामने ! बीकानेर में मचा हड़कंप, अब तक 17 गिरफ्तार, स्वास्थ्य मंत्री सख्त

Bikaner आपणी हथाई न्यूज, राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में गंभीर कैंसर मरीजों के लिए निशुल्क उपलब्ध कराए जाने वाले महंगे जीवनरक्षक इंजेक्शनों के दिल्ली के कथित काले बाजार में पहुंचने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट सेल ने संदिग्ध दवा नेटवर्क का खुलासा करते हुए महंगे कैंसर इंजेक्शनों और बड़ी मात्रा में नकदी बरामद की है। जांच में जब्त दवाओं में शामिल एक विशेष बैच का संबंध राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (RMSCL) के जरिए बीकानेर के आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर इंस्टीट्यूट, पीबीएम अस्पताल को भेजी गई सरकारी आपूर्ति से सामने आने का दावा किया गया है।

22 महंगे कैंसर वायल और लाखों की नकदी बरामद

पुलिस कार्रवाई के दौरान संदिग्धों के कब्जे से 22 महंगे कैंसर इंजेक्शन के वायल तथा 27.19 लाख रुपये की नकदी बरामद किए जाने की बात सामने आई है। बरामद दवाओं में बावेंसियो, कीट्रूडा, डार्ज़ालेक्स, इमफिंज़ी, इरबिटक्स और एडसेट्रिस जैसे महंगे कैंसर उपचार में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन शामिल बताए गए हैं। इन दवाओं की कीमत बाजार में प्रति वायल लाखों रुपये तक पहुंचती है।

बीकानेर के सरकारी अस्पताल तक पहुंचा जांच का सिरा

मामले में सबसे अहम कड़ी बावेंसियो 200 एमजी/10 एमएल इंजेक्शन के बैच नंबर AU052510 को बताया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस बैच का निर्माण फरवरी 2025 में हुआ था और इसकी वैधता जनवरी 2028 तक थी। पुलिस की जांच में संबंधित फार्मा कंपनी से बैच की पुष्टि कराए जाने के बाद यह सामने आया कि यह आपूर्ति राजस्थान सरकार के लिए की गई थी और RMSCL के माध्यम से बीकानेर स्थित आचार्य तुलसी रीजनल रिसर्च कैंसर इंस्टीट्यूट को भेजी गई थी।

इस खुलासे ने सरकारी अस्पतालों में महंगी दवाओं की खरीद, भंडारण, वितरण और मरीजों को दिए जाने की पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सरकारी सप्लाई की पहचान मिटाकर बेचने का आरोप

जांच से जुड़े विवरण के अनुसार कुछ जब्त वायल पर मौजूद ‘राजस्थान सरकार की आपूर्ति—बिक्री के लिए नहीं’ जैसी पहचान को मिटाए जाने की बात भी सामने आई है। आशंका जताई जा रही है कि सरकारी आपूर्ति की दवाओं को सामान्य बाजार की दवा के रूप में पेश कर अवैध तरीके से बेचने का प्रयास किया गया।

हालांकि, सरकारी अस्पताल से दवा किस स्तर पर बाहर निकली और इसमें किसकी भूमिका रही, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

फर्जी रिकॉर्ड से लेकर दवा डायवर्ट करने तक की आशंका

जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि क्या सरकारी दवाओं के रिकॉर्ड में हेरफेर कर उन्हें मरीजों के नाम पर जारी दिखाया गया और बाद में उन्हें बाजार में पहुंचाया गया। अस्पताल के स्टॉक रजिस्टर, दवा वितरण रिकॉर्ड, मरीजों के उपचार संबंधी दस्तावेज, इंडेंट और संबंधित बैच की आपूर्ति से जुड़े दस्तावेज जांच के महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।

फिलहाल फर्जी मरीजों के नाम पर दवा जारी करने या इस्तेमाल किए गए वायल में दूसरी दवा भरकर बेचने जैसी आशंकाओं की भी चर्चा है, लेकिन इन दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

दिल्ली से मुंबई तक नेटवर्क की जांच

दिल्ली पुलिस की प्रारंभिक पड़ताल में इस नेटवर्क के तार राजस्थान और दिल्ली के अलावा महाराष्ट्र के मुंबई क्षेत्र तक जुड़े होने की आशंका जताई गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सरकारी आपूर्ति की दवाएं किन माध्यमों से दिल्ली पहुंचीं और इनके संभावित खरीदार कौन थे।

मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है और पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

स्वास्थ्य मंत्री ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश

राजस्थान में सरकारी कैंसर दवाओं के संभावित दुरुपयोग का मामला सामने आने के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तथ्यात्मक जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में दवा की खरीद से लेकर RMSCL के भंडारण, परिवहन, बीकानेर अस्पताल तक पहुंचने, स्टॉक में दर्ज होने और मरीजों को जारी किए जाने तक की पूरी प्रक्रिया खंगाली जाएगी।

सरकार की जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि संबंधित बैच की दवा सरकारी आपूर्ति से निकलकर दिल्ली तक कैसे पहुंची और इस पूरी प्रक्रिया में कहीं नियमों का उल्लंघन या मिलीभगत तो नहीं हुई।

RMSCL से मांगे गए दस्तावेज

दिल्ली पुलिस की ओर से RMSCL के प्रबंध निदेशक को नोटिस दिए जाने और संबंधित बैच की खरीद, आवंटन, प्राप्ति, अस्पताल को भेजे जाने तथा उपयोग से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। जांच आगे बढ़ने के साथ बीकानेर के आचार्य तुलसी कैंसर अस्पताल के दवा स्टॉक और मरीजों के उपचार रिकॉर्ड का मिलान किया जा सकता है।

अब तक 17 आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली क्राइम ब्रांच पुलिस अब तक इस मामले में 17 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इस जांच में रैकेट के तार दिल्ली-एनसीआर ,मुंबई ,नवी मुंबई ,हैदराबाद ,हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान तक फैले हुए हैं।  दिल्ली क्राइम ब्रांच के डिप्टी कमिश्नर आदित्य गौतम के मुताबिक पुलिस टीम की कार्रवाई में 581 भरी हुई शीशियां, 6 खाली शीशिया साथ खाली दवा की डिब्बे और 3021 दवा यूनिट बरामद की गई है ।जिनकी अनुमानित कीमत 9 करोड रुपए आंकी गई है। इसके अलावा आरोपियों के पास से 50 लाख रुपए नगद मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, और रजिस्टर भी बरामद हुई है जिनमे इन दवाओं की खरीद बिक्री और वित्तीय लेनदेन का हिसाब दर्ज है। पकड़े गए आरोपियों में अभिषेक वैश्य ,शुभम कुमार चौधरी, गगन ,सतीश कुमार ,मुकेश ,आयुष विश्वास त्यागी जैसे कई नाम सामने आए हैं बरहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

गरीब कैंसर मरीजों के हक पर बड़ा सवाल

यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि ये दवाएं सामान्य बाजार में बेहद महंगी हैं, जबकि सरकारी व्यवस्था के तहत जरूरतमंद मरीजों को उपचार के लिए उपलब्ध कराई जाती हैं। यदि सरकारी आपूर्ति की दवाएं वास्तव में कालाबाजारी के नेटवर्क तक पहुंची हैं, तो यह केवल आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं बल्कि गंभीर मरीजों के उपचार और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा सवाल है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजस्थान सरकार की निशुल्क व्यवस्था से निकली महंगी कैंसर दवा दिल्ली के बाजार तक कैसे पहुंची? दिल्ली पुलिस की जांच और राजस्थान सरकार की तथ्यात्मक पड़ताल से इस सवाल का जवाब सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल मामले में किसी भी अस्पतालकर्मी या अधिकारी की भूमिका को जांच पूरी होने से पहले दोषी मानना उचित नहीं होगा।



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