
बीकानेर। छोटी काशी के नाम से विख्यात बीकानेर के ऐतिहासिक ‘पुष्करणा सावे’ की रंगत और परंपराओं को सहेजने की दिशा में बीकानेर के चर्चित न्यूज पोर्टल ‘आपणी हथाई’ ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार किया है। सावे की स्मृतियों और जानकारियों से लबरेज ‘सावा विशेषांक’ अब पाठकों के लिए ई-बुक के रूप में भी उपलब्ध हो गया है।
आपको बता दे कि इससे पहले शनिवार, 7 फरवरी को शहर के हृदय स्थल और बीकानेर की संस्कृति की राजधानी के रूप में विख्यात बारह गुवाड़ चौक में आयोजित एक गरिमामयी ‘पुस्तक परिचय एवं सम्मान समारोह’ का आयोजन हुआ था।
मंच पर नजर आई शहर की विभूतियां
कार्यक्रम के दौरान परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम देखने को मिला। समारोह में मुख्य अतिथियों के रूप में शहर की विभिन्न क्षेत्रों की दिग्गज हस्तियां उपस्थित रहीं जिसमें नथमल पुरोहित: (प्रसिद्ध कर्मकांड भास्कर),जुगल किशोर ओझा ‘पुजारी बाबा'(कर्मकांडी एवं गायत्री उपासक),मदन गोपाल व्यास: पूर्व न्यायाधिपति एवं वर्तमान चेयरमेन (रेरा),जेठानंद व्यास ( विधायक, बीकानेर पश्चिम) ,डॉ. बी.डी. कल्ला पूर्व कैबिनेट मंत्री, राजेश चूरा: उद्योगपति एवं समाजसेवी आपणी हथाई के मंच पर नजर आए। इन अतिथियों ने पुष्करणा सामूहिक विवाह को लेकर अपनी अपनी बात रखी। वही आपणी हथाई के संपादक बलदेव रंगा और गिरीश श्रीमाली को इस पुस्तक के प्रकाशन के लिए शुभकामनाएं भी दी। कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्धजन भी शामिल रहे जिसमें बृजेश्वर लाल व्यास, भैरुरत्न सूरदासाणी, पंडित जतनलाल श्रीमाली, वीरेंद्र किराडू, पूर्व पार्षद दुर्गादास छंगाणी, सुरेंद्र व्यास, अधिवक्ता मुकुंद व्यास, वेद व्यास, बृजमोहन पुरोहित, भाईश्री, कुसुम आचार्य, पुष्करणा महिला मंडल सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन शहर के चर्चित उद्घोषक रवींद्र हर्ष ने किया।
समारोह की खास बातें
- अतिथियों ने सराहा : अतिथियों ने ‘आपणी हथाई’ की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सावे की जानकारी को एक किताब के रूप में लाना नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक आधुनिक माध्यम है।
- सावे का दस्तावेजीकरण: वक्ताओं ने कहा कि पुष्करणा सामूहिक विवाह (सावा) केवल एक आयोजन नहीं बल्कि बीकानेर की सांस्कृतिक विरासत है, जिसे इस विशेषांक के जरिए सहेजा गया है।
- सम्मान समारोह: इस अवसर पर पुस्तक में योगदान देने वाले समाज के लोगों एवं सरकारी विभाग में अपनी मेहनत के दम लगे व्यक्तित्वों का सम्मान भी किया गया।
ई-बुक की विशेषता
यह ई-बुक उन प्रवासियों के लिए भी एक वरदान साबित होगी जो बीकानेर से बाहर रहकर अपनी संस्कृति से जुड़े रहना चाहते हैं। इसमें सावे के इतिहास, रीति-रिवाजों और दुर्लभ तस्वीरों का संग्रह किया गया है।


