

आपणी हथाई न्यूज, हिंदी सिनेमा के ‘स्वर्ण युग’ की पहचान रहे वरिष्ठ अभिनेता सुदेश कुमार अब हमारे बीच नहीं रहे। 95 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली, जिसकी पुष्टि उनकी सुपुत्री मिशिका धवन जमतानी ने की है। 50, 60 और 70 के दशक में अपनी सादगी और प्रभावशाली अभिनय से पहचान बनाने वाले सुदेश कुमार ने मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट में अपनी अंतिम यात्रा पूरी की, जहाँ फिल्म जगत की कई हस्तियों ने उन्हें नम आँखों से विदाई दी।

सुदेश कुमार के अभिनय की जड़ें ‘पृथ्वी थिएटर’ से जुड़ी थीं, जिसने उनके प्रदर्शन को एक संजीदा गहराई दी। उन्होंने न केवल मुख्य अभिनेता के तौर पर अपनी काबिलियत साबित की, बल्कि एक चरित्र अभिनेता के रूप में भी अमिट छाप छोड़ी। राज कपूर के साथ उनका गहरा जुड़ाव रहा; उन्होंने अभिनय के साथ-साथ निर्देशन की बारीकियां भी सीखीं और कल्ट क्लासिक फिल्म ‘दो बदन’ (1966) में बतौर सहायक निर्देशक अपनी सेवाएं दीं।
उनके करियर ग्राफ में ‘छोटी बहन’ (1959) और ‘सारंगा’ (1961) जैसी यादगार फिल्में शामिल हैं, जिन्होंने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बनाया। इसके अलावा ‘रॉकेट गर्ल’, ‘धरती’, ‘वारिस’, ‘खानदान’ और ‘मन मंदिर’ जैसी फिल्मों में उनके किरदारों को आज भी सराहा जाता है। उनके निधन से बॉलीवुड ने एक ऐसा कलाकार खो दिया है जिसने सिनेमा के संक्रमण काल को अपनी आंखों से देखा और उसे जीया था।


