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Bikaner : टैक्स चोरी मामलें में तुलसानी ग्रुप को हाईकोर्ट से झटका, कोर्ट ने घरों पर छापेमारी को बताया वैध

आपणी हथाई न्यूज, राजस्थान हाईकोर्ट ने करोड़ों रुपये की कथित टैक्स चोरी से जुड़े चर्चित मामले में बीकानेर के तुलसानी ग्रुप को बड़ा झटका देते हुए उनकी सभी याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने अपने अहम फैसले में स्पष्ट किया कि यदि जांच एजेंसी के पास पर्याप्त आधार और “विश्वास करने का कारण” मौजूद हो, तो व्यापारियों के आवासीय परिसरों पर तलाशी लेना भी पूरी तरह कानून सम्मत है।

यह फैसला जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने सुनाया। मामला बीकानेर की फर्मों — मैसर्स अनिल शुगर कैंडी वर्क्स, मैसर्स तुलसानी फूड इंडस्ट्रीज और मैसर्स नगद नारायण एग्रो फूड — से जुड़ा था। अदालत ने वाणिज्यिक कर विभाग की तलाशी और दस्तावेज जब्ती की कार्रवाई को वैध करार देते हुए कहा कि विभाग ने निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया था।

दरअसल, वर्ष 2011 में वित्त विभाग को मिली एक गुमनाम शिकायत में आरोप लगाया गया था कि तुलसानी ग्रुप से जुड़ी कई फर्में फर्जी बिलिंग, टैक्स फ्री वस्तुओं की आड़ में अन्य सामान बेचने और सी-फॉर्म के दुरुपयोग के जरिए बड़े स्तर पर टैक्स चोरी कर रही हैं। जांच के बाद नवंबर 2012 में विभाग ने व्यापारिक प्रतिष्ठानों के साथ कारोबारियों के घरों पर भी छापेमारी की थी और कई अहम दस्तावेज जब्त किए थे।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी थी कि घरों पर की गई कार्रवाई बिना पर्याप्त आधार के की गई और राजस्थान वैट एक्ट की धारा 75 केवल व्यापारिक परिसरों तक सीमित है। वहीं विभाग ने कोर्ट को बताया कि संबंधित आवासीय पते आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज थे और वहां से कारोबारी दस्तावेज भी मिले थे।

हाईकोर्ट ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में कहा कि विभाग की कार्रवाई केवल संदेह पर आधारित नहीं थी, बल्कि उसके पास पर्याप्त रिकॉर्ड और पूर्व विवादों से जुड़ी सामग्री मौजूद थी। कोर्ट ने माना कि एक ही परिवार द्वारा संचालित फर्मों के बीच समान कारोबार और पुराने कर विवादों के चलते जांच एजेंसी का संदेह उचित था। इसके साथ ही अदालत ने राजस्थान वैट एक्ट की धारा 75 और नियम 51 के तहत हुई कार्रवाई को वैध ठहराते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।

 



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