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Bikaner : संतों के सानिध्य में गोमाता का पूजन, गोभक्तों ने किया देवकिशन चांडक का अभिनंदन

Bikaner आपणी हथाई न्यूज, गोसेवा, समर्पण और परोपकार की भावना से जुड़ा एक अनूठा सेवा अभियान गुरुवार को पुगल फांटा स्थित श्री गंगा जुबली पिंजराप्रोल गोशाला में विशेष धार्मिक आयोजन के साथ चर्चा का केंद्र बना। गोभक्त देवकिशन चांडक ‘देवश्री’ की प्रेरणा से संचालित इस सेवा के पांचवें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों से पहुंचे साधु-संतों के सानिध्य में गोमाता का विधि-विधान से पूजन और आरती की गई। इस दौरान सैकड़ों गोभक्तों ने देवश्री का अभिनंदन करते हुए उनके सेवा कार्यों की सराहना की।

गोसेवा के इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि 5 नवंबर 2022 से शुरू हुई गो-प्रसादी की व्यवस्था पिछले 48 महीनों से बिना किसी व्यवधान के निरंतर जारी है। प्रतिदिन करीब 14 क्विंटल गो-प्रसादी के माध्यम से गोवंश के भोजन की व्यवस्था की जा रही है। चार वर्षों से लगातार चल रही यह सेवा गोभक्ति और सामाजिक सहभागिता का प्रेरणादायी उदाहरण बन गई है।

दो दशक से गोशाला सेवा से जुड़े हैं देवश्री

देवकिशन चांडक ने बताया कि वे पिछले दो दशक से गोशाला की सेवा से जुड़े हुए हैं। चार वर्ष पूर्व शुरू की गई गो-प्रसादी व्यवस्था आज समाज के सहयोग से व्यापक स्वरूप ले चुकी है। शहर के गणमान्य नागरिकों, प्रवासी बंधुओं, भामाशाहों और गोभक्तों के सहयोग से यह सेवा निरंतर आगे बढ़ रही है। अब तक करीब दो लाख लोग गोमाता की आरती में सहभागी बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति का प्रयास नहीं, बल्कि सामूहिक गोभक्ति और समाज के समर्पण का परिणाम है।

जीवन के मांगलिक अवसरों को गोसेवा से जोड़ रहे शहरवासी

गोशाला में अब शहरवासी अपने जीवन की खुशियों को गोसेवा के साथ साझा करने लगे हैं। जन्मोत्सव, वैवाहिक वर्षगांठ, परीक्षा में सफलता, गृह प्रवेश और प्रतिष्ठान के शुभारंभ जैसे अवसरों पर गोमाता के लिए महाप्रसादी की व्यवस्था की जा रही है। हजारों गोवंश को भोजन करवाकर लोग अपने विशेष अवसरों को सेवा और परोपकार से जोड़ रहे हैं। इस पहल से समाज में गोसेवा के प्रति सहभागिता और समर्पण की भावना को नई दिशा मिली है।

संतों ने बताया गोसेवा को पुण्य और परमार्थ का श्रेष्ठ माध्यम

आयोजन में स्वामी करपात्री धाम, केदारघाट वाराणसी के अधिष्ठाता स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती, करपात्री संस्कृत वेद विद्यालय बीकानेर के अधिष्ठाता श्रीधरानंद सरस्वती, नवलेश्वर मठ बीकानेर के अधिष्ठाता योगी शिवसत्यानाथ महाराज तथा सागर मठ बीकानेर के अधिष्ठाता दाता श्री रामेश्वरानंद सहित विभिन्न धार्मिक पीठों के संतों ने शिरकत की।

संतों ने गोसेवा को भारतीय संस्कृति, करुणा और परोपकार का प्रतीक बताते हुए कहा कि लगातार चार वर्षों तक हजारों गोवंश के भोजन की व्यवस्था करना दृढ़ संकल्प, श्रद्धा और समर्पण का परिचायक है। ऐसे सेवा कार्य समाज में धर्म, संस्कार और जीवों के प्रति संवेदनशीलता को मजबूत करते हैं। संतों ने देवकिशन चांडक को आशीर्वाद प्रदान करते हुए इस अभियान के निरंतर विस्तार की मंगलकामना की।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ गोपूजन

समारोह में बाल संत डॉ. श्रीछैल बिहारी ने गोमाता की आरती करवाई। प्रकांड कर्मकांड अनुष्ठानकर्ता विद्वान पंडित किराडू ज्योतिषाचार्य का सानिध्य भी रहा। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के बीच गोमाता का पूजन किया गया। साधु-संतों के आगमन से पूरा गोशाला परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर नजर आया।

बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक उमड़े गोभक्त

आयोजन में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सहित समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। अधिवक्ता, डॉक्टर, इंजीनियर, साहित्यकार, पत्रकार, कलाकार, समाजसेवी और भामाशाहों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु गोशाला पहुंचे। सभी ने गोमाता की आरती में भाग लेकर देवकिशन चांडक का अभिनंदन किया।

इस अवसर पर गंगा जुबली पिंजराप्रोल गोशाला के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता जनार्दन कल्ला, बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास, बीकानेर पूर्व विधायक सिद्धि कुमारी, गोभक्त श्रीभगवान अग्रवाल और डॉ. श्याम अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन रविंद्र हर्ष एवं ज्योतिप्रकाश रंगा ने किया।



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