
आपणी हथाई न्यूज, संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल पीबीएम अस्पताल लगातार विवादों के चलते सुर्ख़ियों में रह रहा है।एक बार फिर अस्पताल प्रशासन विवादों के घेरे में है। ताज़ा मामला एक टेंडर प्रक्रिया से जुड़ा है।अस्पताल द्वारा जारी 2 करोड़ रुपये के सर्जिकल कॉटन टेंडर (2026-SPMCB-531607-1) में नियमों को ताक पर रखकर एक विशेष फर्म को फायदा पहुँचाने और करोड़ों रुपये के राजस्व गबन के गंभीर आरोप लगे हैं। इस संबंध में डीसी को एक ज्ञापन सौंपकर टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर दोबारा पारदर्शी तरीके से टेंडर करवाने की मांग की गई है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि ‘ट्यूलिप सर्जिकल‘ नामक फर्म को लाभ पहुँचाने के लिए टेंडर की शर्तों में बार-बार बदलाव किए जा रहे हैं। RTPP नियमों के अनुसार टेंडर वैल्यू का अधिकतम 33% टर्नओवर मांगा जा सकता है, लेकिन आरोप है कि फर्म विशेष को फायदा देने के लिए इसे 50% (1 करोड़ रुपये) कर दिया गया। सामान्यतः टेंडर वैल्यू की 20% सॉल्वेंसी मांगी जाती है, लेकिन इस बार इसे बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दिया गया, ताकि अन्य छोटी फर्में प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाएं। शिकायतकर्ता के अनुसार, बाजार में सर्जिकल कॉटन की दर 150-160 रुपये प्रति किलो है, जबकि मिलीभगत के कारण विभाग इसे 300 रुपये प्रति किलो में खरीद रहा है। दावा है कि पिछले 5-7 वर्षों से इस प्रक्रिया के जरिए सरकार को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है साथ ही आरोप है कि MD-5 CDSCO जैसे अनिवार्य लाइसेंस की शर्तों को भी दरकिनार या शिथिल किया गया है।
ज्ञापन के अनुसार, 13 फरवरी 2026 को खोले गए टेंडर में केवल एक ही फर्म (ट्यूलिप सर्जिकल) तकनीकी रूप से सामने आई। नियमों के अनुसार कम से कम दो फर्मों का तकनीकी रूप से सक्षम होना अनिवार्य है, लेकिन आरोप है कि खरीद कमेटी ने नियमों को सरल करने या पारदर्शिता बरतने के बजाय उक्त फर्म को ही टेंडर दिलाने की तैयारी कर ली है।
शिकायतकर्ता ने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि वर्तमान टेंडर प्रक्रिया को तुरंत निरस्त किया जाए।मिलीभगत में शामिल व्यक्तियों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर किया जाए।साथ ही मांग की गई है कि प्रशासनिक देखरेख में RTPP नियमों के तहत दोबारा पारदर्शी टेंडर लगाया जाए।


