
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 आपणी हथाई न्यूज, राजस्थान में 309 नगरीय निकायों के आगामी आम चुनाव की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है। चुनावी प्रक्रिया के दौरान विकास कार्यों और आम लोगों से जुड़े रोजमर्रा के प्रशासनिक काम प्रभावित न हों, इसके लिए स्वायत्त शासन विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने साफ किया है कि पहले से चल रहे और सामान्य प्रकृति के जरूरी काम आचार संहिता के कारण बंद नहीं होंगे।

स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक जुईकर प्रतीक चंद्रशेखर की ओर से जारी निर्देशों में निकाय अधिकारियों को चुनाव संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के साथ नागरिक सुविधाओं को सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

भवन निर्माण से जुड़े काम नहीं रुकेंगे
राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 194 के तहत भवन मानचित्र स्वीकृति से जुड़े प्रकरणों का निर्धारित समय सीमा में निस्तारण किया जा सकेगा। नए निर्माण, पुनर्निर्माण अथवा भवन में संशोधन से संबंधित आवेदनों पर नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
इसी तरह पूर्व में स्वीकृत योजनाओं के तहत नीलाम किए गए भूखंडों की पूरी राशि जमा होने पर पट्टे जारी किए जा सकेंगे। पट्टों के नामांतरण, नवीनीकरण और पुनर्वैधीकरण की प्रक्रिया भी जारी रहेगी। आवश्यक स्वीकृति और शुल्क जमा होने की स्थिति में कृषि भूमि के नियमन तथा निर्माण स्वीकृति से संबंधित पट्टे भी जारी किए जा सकेंगे।
पहले से स्वीकृत विकास कार्य चलते रहेंगे
आचार संहिता लागू होने से पहले जिन विकास कार्यों के कार्यादेश जारी हो चुके हैं या जिन पर काम शुरू हो चुका है, उन्हें जारी रखा जा सकेगा। इसके अलावा नई परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने, आवश्यक अनुमोदन लेने तथा निविदा दस्तावेज और नक्शे-डिजाइन तैयार करने जैसी प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर भी रोक नहीं होगी।
सड़क, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी जरूरी नागरिक सुविधाओं की मरम्मत से जुड़े दैनिक एवं आपातकालीन कार्य भी जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देशों के अनुसार कराए जा सकेंगे।
सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर सख्ती
चुनावी प्रचार में सरकारी मशीनरी या निकाय के संसाधनों के दुरुपयोग पर पूरी तरह रोक रहेगी। महापौर, उपमहापौर, अध्यक्ष, सभापति या अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधि चुनाव प्रचार के लिए सरकारी अथवा निकाय के वाहनों और राजकीय सुविधाओं का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। ऐसा करना आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा।
नई घोषणाओं और शिलान्यास-उद्घाटन पर रोक
आचार संहिता के दौरान सरकार और सत्ताधारी दल के लिए नई योजनाओं, परियोजनाओं या लोकलुभावन घोषणाओं को लेकर नियम सख्त हो जाते हैं। नई विकास योजनाओं की घोषणा, नए कार्यों के शिलान्यास और उद्घाटन जैसे कार्यक्रमों पर रोक रहती है। हालांकि पहले से स्वीकृत और नियमानुसार चल रहे कार्यों को निर्धारित प्रावधानों के तहत जारी रखा जा सकता है।
तबादले और नई नियुक्तियां भी नियमों के दायरे में
चुनावी अवधि में अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण तथा नई नियुक्तियों पर भी नियंत्रण रहता है। किसी अधिकारी का स्थानांतरण आवश्यक होने पर संबंधित चुनाव प्राधिकारी की अनुमति लेना जरूरी होगा। इसी तरह चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली नई नियुक्तियों को लेकर भी निर्धारित चुनावी नियमों का पालन करना होगा।
धार्मिक स्थलों से प्रचार पर रोक
राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार के दौरान धर्म, जाति, भाषा या समुदाय के आधार पर तनाव पैदा करने वाली भाषा से बचना होगा। मंदिर, मस्जिद, चर्च या अन्य धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जा सकेगा।
किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति या दीवार पर उसकी अनुमति के बिना पोस्टर, बैनर या झंडे लगाना भी नियमों के खिलाफ होगा। सार्वजनिक सभा, रैली या जुलूस आयोजित करने के लिए संबंधित प्रशासन और पुलिस से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक होगा।
चुनावी व्यवस्था में कलेक्टर और पुलिस की अहम भूमिका
आचार संहिता लागू होने के बाद जिला कलेक्टर जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में चुनावी जिम्मेदारियां संभालते हैं। शांतिपूर्ण मतदान, चुनावी व्यवस्थाओं की निगरानी, मतदान केंद्रों की सुरक्षा और चुनावी खर्च पर नजर रखना उनकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रहता है।
वहीं पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और मतदाताओं को किसी भी तरह के दबाव या भय से मुक्त रखने की होती है। अवैध शराब, नकदी और अन्य प्रतिबंधित सामग्री की आवाजाही पर निगरानी बढ़ाई जाती है। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की गश्त और जांच भी तेज की जा सकती है।
चुनाव ड्यूटी वाले अधिकारी निर्वाचन व्यवस्था के अधीन
चुनाव कार्य में लगाए गए अधिकारी और कर्मचारी चुनाव संबंधी जिम्मेदारियों के निर्वहन के दौरान निर्वाचन व्यवस्था के निर्देशों के अनुसार काम करते हैं। किसी अधिकारी या कर्मचारी के पक्षपातपूर्ण आचरण की शिकायत सामने आने पर निर्वाचन प्राधिकारी नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है।
रैली और सभा के लिए पूर्व सूचना जरूरी
चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार को रैली, जुलूस अथवा सार्वजनिक सभा आयोजित करने से पहले निर्धारित अनुमति लेनी होगी। कार्यक्रम के स्थान, समय और आयोजन की जानकारी संबंधित पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को पहले से देना आवश्यक होगा।
इस तरह नगरीय निकाय चुनाव की आचार संहिता के दौरान एक ओर नई घोषणाओं और सरकारी संसाधनों के राजनीतिक इस्तेमाल पर रोक रहेगी, वहीं दूसरी ओर भवन स्वीकृति, पट्टे, नामांतरण, पहले से स्वीकृत विकास कार्य और जरूरी नागरिक सेवाओं से जुड़े काम आम जनता की सुविधा के लिए जारी रखे जा सकेंगे।



