

आपणी हथाई न्यूज,बीकानेर में बिजली वितरण कंपनी बीकेईएसएल (BKESL) के खिलाफ लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। कंपनी की कार्यप्रणाली, कथित फर्जी बिजली बिलों, मेंटेनेंस के नाम पर बार-बार बिजली कटौती और उपभोक्ताओं की समस्याओं को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में डॉ. भगवान सिंह मेड़तिया के समर्थन में मंगलवार, 23 जून को सुबह 11:15 बजे बीदासर हाउस, तीर्थ स्तंभ पर सर्वसमाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है।
आयोजकों के अनुसार इस बैठक में विभिन्न समाजों, संगठनों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों को एक मंच पर लाकर आगामी आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। बैठक के बाद जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर डॉ. मेड़तिया के खिलाफ दर्ज मुकदमे की निष्पक्ष जांच तथा बीकेसीएल के खिलाफ उठाए जा रहे विभिन्न मुद्दों पर कार्रवाई की मांग की जाएगी।
डॉ. मेड़तिया ने लगाए गंभीर आरोप
डॉ. भगवान सिंह मेड़तिया लगातार BKESL के खिलाफ मुखर रहे हैं। उनका आरोप है कि कंपनी बीकानेर में उपभोक्ताओं की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है और विरोध करने वालों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यहां तक कहा कि कंपनी का रवैया ब्रिटिश हुकूमत जैसा हो गया है और उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई करवाने की कोशिश की जा रही है।
डॉ. मेड़तिया का दावा है कि अब उनके खिलाफ हिस्ट्रीशीट खोलने की तैयारी तक की जा रही है, ताकि आंदोलन को कमजोर किया जा सके। हालांकि इन आरोपों को लेकर संबंधित पक्षों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत 11 जून की रात हुई, जब बिजली की कथित अवैध कटौती के विरोध में डॉ. भगवान सिंह मेड़तिया अपने समर्थकों के साथ BKESL के जयपुर रोड स्थित कार्यालय की ओर पैदल मार्च निकाल रहे थे। इस दौरान एमएन अस्पताल के पास उनकी और सीओ सदर अनुष्ठा कालिया के बीच नोंकझोंक हो गई थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और मामला चर्चा का विषय बन गया।
इसके अगले दिन 12 जून को बीकेसीएल की शिकायत पर बीछवाल थाने में डॉ. मेड़तिया के खिलाफ राजकीय कार्य में बाधा सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद से यह मामला लगातार राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में बना हुआ है।
बार एसोसिएशन और बार काउंसिल भी आए समर्थन में
डॉ. मेड़तिया के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर बार एसोसिएशन बीकानेर और राजस्थान बार काउंसिल ने भी चिंता जताई है। दोनों संस्थाओं ने सरकार को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की है। इससे विवाद को नया आयाम मिला है और कानूनी जगत में भी इस विषय पर चर्चा तेज हो गई है।
सर्वसमाज की बैठक पर टिकी निगाहें
23 जून को प्रस्तावित सर्वसमाज बैठक को आंदोलन की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों से बैठक में शामिल होने की अपील की जा रही है। आयोजकों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि बीकानेर के उपभोक्ताओं और आम जनता के अधिकारों का मुद्दा है।
नेताओं की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
बीकेसीएल के खिलाफ लगातार बढ़ते जनआक्रोश, डॉ. भगवान सिंह मेड़तिया पर दर्ज मुकदमे, निष्पक्ष जांच की मांग और हिस्ट्रीशीट खोलने जैसी चर्चाओं के बीच राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा सवाल भी उठ रहा है। बीकानेर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले केंद्रीय मंत्री, राज्य के कैबिनेट मंत्री, विधायक और सत्तारूढ़ दल के कई प्रमुख नेता अब तक इस पूरे विवाद पर खुलकर सामने नहीं आए हैं।
जनता के एक वर्ग का कहना है कि जब बिजली, उपभोक्ता हित और नागरिक अधिकारों से जुड़ा इतना बड़ा मुद्दा लगातार चर्चा में है, तब जनप्रतिनिधियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर बीकेसीएल और उपभोक्ताओं के बीच चल रहे विवाद पर जनप्रतिनिधियों का स्पष्ट पक्ष क्या है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है।
अब सबकी निगाहें 23 जून को होने वाली सर्वसमाज बैठक और उसके बाद प्रशासन को सौंपे जाने वाले ज्ञापन पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है और प्रशासन तथा जनप्रतिनिधि इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाते हैं।


