Bikaner आपणी हथाई न्यूज, कैंसर के गंभीर मरीजों के लिए बीकानेर के पीबीएम अस्पताल से बड़ी और उम्मीद जगाने वाली खबर सामने आई है। आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर ट्रीटमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट जल्द ही राजस्थान का पहला ऐसा केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां CAR-T सेल थेरेपी की सुविधा शुरू की जाएगी। राज्य सरकार ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के तहत इस अत्याधुनिक उपचार के लिए 30 लाख रुपये की मंजूरी दी है। इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के गंभीर कैंसर मरीजों को भी दुनिया की अत्याधुनिक उपचार पद्धति तक पहुंच मिल सकेगी। निजी अस्पतालों में CAR-T सेल थेरेपी का खर्च करीब 80 लाख से 1 करोड़ रुपये तक बताया जाता है।
चौथे स्टेज के मरीजों के लिए नई उम्मीद
मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. बेनीवाल के अनुसार, CAR-T सेल थेरेपी का उपयोग मुख्य रूप से गंभीर और उन्नत अवस्था के रक्त कैंसर के मरीजों में किया जाएगा। इनमें ल्यूकेमिया, लिंफोमा और मल्टीपल मायलोमा जैसे कैंसर शामिल हैं। इस उपचार में मरीज की अपनी प्रतिरक्षा कोशिकाओं को ही कैंसर से लड़ने के लिए तैयार किया जाता है। हालांकि उपचार के बाद शरीर में तीव्र प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया जैसी गंभीर स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं, इसलिए मरीज को विशेषज्ञों की लगातार निगरानी में रखना बेहद जरूरी होगा।
इसी को देखते हुए पीबीएम अस्पताल में ऐसे मरीजों को बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट की आईसीयू सुविधा में निगरानी में रखने की तैयारी की जा रही है। 24 घंटे चिकित्सा निगरानी और उपचार संबंधी विशेषज्ञता को मजबूत करने के लिए मुंबई के प्रतिष्ठित टाटा मेमोरियल अस्पताल से चिकित्सा कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिलाने को लेकर भी बातचीत चल रही है।
मरीज की अपनी कोशिकाएं करेंगी कैंसर पर हमला
CAR-T सेल थेरेपी को चिकित्सा विज्ञान में ‘जीवित दवा’ के रूप में भी जाना जाता है। इस उपचार में सबसे पहले मरीज के रक्त से टी-सेल्स यानी श्वेत रक्त कोशिकाओं को अलग किया जाता है। इसके बाद प्रयोगशाला में जेनेटिक इंजीनियरिंग के माध्यम से इन कोशिकाओं में विशेष बदलाव किए जाते हैं, ताकि वे कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन पर हमला कर सकें।
इसके बाद इन संशोधित टी-सेल्स की संख्या प्रयोगशाला में बड़ी मात्रा में बढ़ाई जाती है और फिर उन्हें वापस मरीज के शरीर में पहुंचाया जाता है। शरीर में पहुंचने के बाद ये कोशिकाएं कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर उन्हें नष्ट करने में मदद करती हैं। यानी इस उपचार की सबसे खास बात यह है कि मरीज के शरीर की अपनी प्रतिरक्षा कोशिकाओं को ही कैंसर के खिलाफ एक प्रभावी हथियार के रूप में तैयार किया जाता है।
आचार संहिता खत्म होने के साथ ही शुरू होगी अगली प्रक्रिया
पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बीसी घीया के अनुसार, CAR-T सेल थेरेपी शुरू करने को लेकर कैंसर विशेषज्ञों के साथ बैठक हो चुकी है। चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के साथ ही जेनेटिक इंजीनियरिंग लैब के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसके बाद इस अत्याधुनिक उपचार सुविधा को शुरू करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
पीबीएम के आचार्य तुलसी कैंसर संस्थान में रोजाना करीब 300 से 400 कैंसर मरीज उपचार और परामर्श के लिए पहुंचते हैं। हर वर्ष यहां 10 से 12 हजार नए कैंसर मामले सामने आते हैं। ऐसे में CAR-T सेल थेरेपी जैसी अत्याधुनिक सुविधा शुरू होने से बीकानेर ही नहीं, बल्कि राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों के गंभीर कैंसर मरीजों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।


