आपणी हथाई Election update: नगर निगम चुनाव के नतीजे आने से पहले ही बीकानेर की सियासत में हलचल तेज हो गई है। मतगणना के बाद नगर निगम में बोर्ड किसका बनेगा—भाजपा या कांग्रेस, इसका फैसला होगा, लेकिन उससे पहले दोनों प्रमुख दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों को सुरक्षित रखने और संगठन के साथ एकजुट बनाए रखने के लिए दो दिन पहले ही बाड़ेबंदी शुरू कर दी थी। बीकानेर में दोनों दलों का फोकस अब नतीजों के बाद बनने वाले बोर्ड के गणित पर है।
नगर निगम में बहुमत के लिए 41 पार्षदों का आंकड़ा महत्वपूर्ण होगा। ऐसे में यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय और अन्य दलों से निर्वाचित पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। स्थानीय रिपोर्टों में भी दोनों दलों द्वारा निर्दलीय प्रत्याशियों पर नजर रखने और संभावित समीकरणों को साधने की चर्चा है।
कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों को एक जगह रखकर रणनीति पर मंथन कर रही है। बाड़ेबंदी के दौरान प्रत्याशी आपस में क्रिकेट खेलते हुए भी नजर आए। यानी राजनीतिक तनाव के बीच प्रत्याशियों को व्यस्त और एकजुट रखने के लिए मनोरंजन की गतिविधियां भी कराई जा रही हैं। राजस्थान के अन्य निकाय क्षेत्रों में भी बाड़ेबंदी के दौरान प्रत्याशियों के क्रिकेट और लूडो खेलने की तस्वीरें सामने आई हैं।
कांग्रेस की रणनीति सिर्फ प्रत्याशियों को साथ रखने तक सीमित नहीं है। पार्टी की नजर उन संभावित निर्दलीय पार्षदों पर भी है, जिनकी जीत के बाद बोर्ड गठन के दौरान भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ नेता भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
दूसरी ओर भाजपा ने अपने प्रत्याशियों को बीकानेर से बाहर जोधपुर के एक रिसॉर्ट में रखा है। रिपोर्टों के मुताबिक वहां प्रत्याशियों के साथ संगठन की ओर से रणनीति और प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियां भी चल रही हैं।
भाजपा की इस बाड़ेबंदी के दौरान केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में उनकी मौजूदगी को चुनाव परिणाम के बाद बोर्ड गठन की तैयारियों और पार्टी के पार्षदों के साथ संवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि प्रशिक्षण के दौरान किन विषयों पर चर्चा हुई और बोर्ड गठन को लेकर पार्टी की अंदरूनी रणनीति क्या है, इसकी पूरी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
मतदान खत्म होने के बाद अब दोनों दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने संभावित विजयी पार्षदों को एकजुट रखना है। अगर किसी पार्टी को 41 या उससे अधिक सीटें मिलती हैं तो बोर्ड गठन का रास्ता अपेक्षाकृत आसान होगा। लेकिन यदि मुकाबला करीबी रहा और दोनों प्रमुख दल बहुमत से दूर रहे, तो निर्दलीय पार्षद सत्ता की चाबी बन सकते हैं। यही वजह है कि नतीजों से पहले ही भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने संभावित समीकरणों पर काम कर रही हैं।
बीकानेर में मुकाबला सिर्फ पार्षदों की जीत-हार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब असली सवाल यह है कि कौन 41 का आंकड़ा पार करेगा और किस दल के पास बोर्ड बनाने के लिए पर्याप्त समर्थन जुटेगा। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषण में भी निर्दलीयों को संभावित किंगमेकर माना जा रहा है।


