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Bikaner Crime : 6.80 करोड़ की साइबर ठगी में बीकानेर का आरोपी गिरफ्तार, 12 तक पहुंची गिरफ्तारियों की संख्या

Bikaner Crime आपणी हथाई न्यूज, राजस्थान में 6.80 करोड़ रुपये की बड़ी साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान बीकानेर निवासी लक्ष्मण सिंह उर्फ नीशू के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, आरोपी साइबर ठगी करने वाले गिरोह के सदस्यों के लिए बैंक खाते, जरूरी दस्तावेज और ठहरने की व्यवस्था कराने में मदद करता था। इस मामले में अब तक कुल 12 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह के अनुसार, साइबर ठगों ने ठगी की रकम को इधर-उधर करने के लिए फर्जी और म्यूल बैंक खातों के साथ एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड, यूपीआई, क्यूआर कोड, डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया। ठगी की रकम को कई बैंक खातों के जरिए अलग-अलग स्तरों पर ट्रांसफर किया जाता था और बाद में इसका एक हिस्सा क्रिप्टोकरेंसी, जिसमें यूएसडीटी भी शामिल है, में बदल दिया जाता था।

पुलिस की जांच में सामने आया है कि साइबर ठगी से जुड़े लोग टेलीग्राम के ‘F2F Jaipur Delhi’ नामक समूह के जरिए एक-दूसरे के संपर्क में थे। इसी नेटवर्क के माध्यम से फर्जी या म्यूल बैंक खाते, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और पासबुक किट की व्यवस्था किए जाने का आरोप है। इन खातों में आने वाली रकम को एटीएम, चेक, यूपीआई, क्यूआर कोड और कैश डिपॉजिट मशीन के जरिए निकाला या दूसरे खातों में भेजा जाता था।

पुलिस के मुताबिक, लक्ष्मण सिंह ने 23 अगस्त को रींगस स्थित एक होटल में संदीप कुमार नाम के व्यक्ति के लिए कमरा उपलब्ध करवाया था। आरोप है कि इसके बाद लक्ष्मण ने उससे बैंक से संबंधित दस्तावेज, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पहचान संबंधी दस्तावेज और बैंक खाते से जुड़ी सिम हासिल की। इस सिम के जरिए बैंक का मोबाइल एप्लिकेशन सक्रिय किया गया और बाद में संबंधित खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने तथा उसे आगे ट्रांसफर करने में किया गया।

यह पूरा मामला जयपुर में अगस्त महीने में दर्ज 6.80 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधियों ने एक निजी कंपनी के कंप्यूटर सिस्टम तक पहुंच बनाई और व्हाट्सऐप वेब में हेरफेर कर कंपनी के एक निदेशक की पहचान का इस्तेमाल किया। ठगों ने निदेशक की प्रोफाइल फोटो और नाम का इस्तेमाल करने के साथ पुरानी बातचीत जैसी चैट तैयार कर कंपनी के अकाउंट्स हेड का भरोसा हासिल किया।

इसके बाद खुद को कंपनी का निदेशक बताकर साइबर ठगों ने अकाउंट्स हेड से तत्काल भुगतान करने के लिए कहा। उनके निर्देश पर 24 अगस्त को कंपनी के तीन अलग-अलग बैंक खातों में कुल 6.80 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। बाद में कंपनी को पता चला कि इन भुगतानों को उसके किसी भी निदेशक ने अधिकृत नहीं किया था। इसके बाद 25 अगस्त को केंद्रीय साइबर क्राइम पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क और रकम को इधर-उधर करने में कथित रूप से मदद करने वाले लोगों की भूमिका खंगालते हुए लक्ष्मण सिंह को भी गिरफ्तार किया है।



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