

आपणी हथाई न्यूज जयपुर, प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव समय पर न होने को लेकर कानूनी पेच फंस गया है। हाईकोर्ट द्वारा जारी अवमानना नोटिस के बाद अब राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) अपना पक्ष रखने की तैयारी में है। आयोग के सूत्रों का कहना है कि चुनाव की तैयारियां मार्च के पहले सप्ताह में ही पूरी कर ली गई थीं, लेकिन राज्य सरकार की ओर से आरक्षण और परिसीमन संबंधी आवश्यक डेटा उपलब्ध नहीं कराने के कारण प्रक्रिया बीच में ही अटक गई।
सरकार की सुस्ती से बिगड़ा चुनावी गणित
आयोग ने स्पष्ट किया है कि पंचायती राज संस्थाओं की अंतिम मतदाता सूची 25 फरवरी, 2026 को ही प्रकाशित कर दी गई थी। इसके तुरंत बाद सरकार को एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षण (Reservation) चार्ट सौंपना था। आयोग ने 9 मार्च को पंचायती राज सचिव को कड़ा पत्र लिखकर चेतावनी भी दी थी, लेकिन सरकार ने 31 मार्च को यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि ‘प्रक्रिया अभी जारी है’।
नगरीय निकायों में भी ‘कम्युनिकेशन गैप’
नगरीय निकाय चुनावों को लेकर भी स्थिति कमोबेश वैसी ही रही। आयोग ने दिसंबर 2025 से लेकर फरवरी 2026 तक आधा दर्जन से अधिक पत्र लिखे, लेकिन जवाब न मिलने पर आयोग को 20 फरवरी को एकतरफा निर्णय लेते हुए मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्यक्रम जारी करना पड़ा। अब 196 निकायों की सूची 22 अप्रैल और शेष 113 निकायों की सूची 8 मई तक आने की संभावना है।
प्रमुख घटनाक्रम: एक नज़र में (Timeline)
तिथि – घटनाक्रम
31 दिसंबर, 2025 पंचायतों का परिसीमन कार्य पूरा हुआ।
25 फरवरी, 2026 पंचायत चुनाव हेतु अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन।
09 मार्च, 2026 आयोग द्वारा सरकार को आरक्षण सूचना हेतु ‘अल्टीमेटम’ पत्र।
20 फरवरी, 2026 निकाय चुनावों के लिए आयोग का एकतरफा कार्यक्रम जारी।
31 मार्च, 2026 सरकार का जवाब- ‘काम चल रहा है’ और ओबीसी आयोग का कार्यकाल बढ़ा।


