


Crime आपणी हथाई न्यूज, जैसलमेर जिले की मोहनगढ़ मंडी में दो व्यापारियों की हुई निर्मम हत्या के मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने हरियाणा के एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, 20 अक्टूबर की रात मोहनगढ़ कस्बे की मंडी के पास स्थित दुकान में बीकानेर के व्यापारी मदनलाल सारस्वत 45 और मुनीम रेवंत राम की धारदार हथियार से बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। 21 अक्टूबर को मृतक व्यापारी के बेटे पंकज सारस्वत में अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करवाया था जिस पर पुलिस ने गंभीरता बढ़ाते हुए जिला पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल गठित किया गया और जिसकी जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रवीण कुमार को सौंपी गई।
इस टीम ने तकनीकी साक्ष और खुफिया इनपुट्स के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की जिसमें पुलिस ने करीब 600 किलोमीटर के दायरे में लगे 500 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे कंगाल डालें इस दौरान पुलिस को एक सफेद आल्टो कर घटना के दिन मोहनगढ़ मंडी से निकलते हुए कैमरे में नजर आए कर के नंबर प्लेट से पूछता हुई किया वही गाड़ी है जो व्यापारी मदनलाल के नाम पर रजिस्टर्ड थी पुलिस ने गाड़ी को ट्रैक किया जो जैसलमेर से हनुमानगढ़ की दिशा में जाती हुई नजर आई।
इस दौरान पुलिस को एक अहम सुर जी भी नजर आया जिसमें एक युवक पेट्रोल पंप पर पेट्रोल भरवाता नजर आ रहा था रिकॉग्निशन तकनीक के मदद से पुलिस ने इस योग की पहचान गुरप्रीत सिंह के रूप में की इसके बाद पुलिस ने गुरप्रीत सिंह मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल्स और लोकेशन के रिकॉर्ड गंगा ले जिससे पता चला की वारदात से दो दिन पहले हुआ जैसलमेर में ही रुका हुआ था जात में यह भी सामने आया की घटना से पहले एक नया सिम कार्ड भी खरीदा था जो हत्या की रात तक एक्टिव भी था इन सभी सबूत के आधार पर पुलिस ने उसे मुख्य आरोपी मानते हुए अलग-अलग जगह पर भविष्य देना शुरू कर दिया आखिरकार पुलिस को सूचना मिली कि वह हरियाणा के सिरसा इलाके में छुपा हुआ है इसके बाद जैसलमेर पुलिस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
हत्या के पीछे की वजह
पुलिस के अनुसार हत्या के पीछे पैसों के लेनदेन और निर्माण कार्य से जुड़े विवाद का एंगल सामने आया है। बताया जा रहा है कि व्यापारी मदनलाल ने अपने घर और दुकान के निर्माण का ठेका कुछ मजदूरों को दिया था, जिनमें से कुछ पंजाब के रहने वाले थे। मदनलाल ने काम पसंद न आने पर बीच में ही ठेका रद्द कर दिया था। हालांकि जितना काम हुआ था, उसका भुगतान कर दिया गया था, लेकिन मजदूर पूरी रकम की मांग पर अड़े रहे। इसी विवाद के चलते हत्या की साजिश रची गई मानी जा रही है।


