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Rajasthan Politics : गहलोत, पायलट और वसुंधरा की बनी ‘सुपर टीम’! राजस्थान विधानसभा में दिखेगा राजनीति का नया रंग

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आपणी हथाई पॉलिटिक्स न्यूज,राजस्थान की राजनीति में एक बेहद दिलचस्प और अकल्पनीय नजारा देखने को मिलने वाला है। जिन दिग्गज नेताओं को हमेशा एक-दूसरे के धुर विरोधी के रूप में देखा गया, वे अब एक ही मेज पर बैठकर विधानसभा के नियम-कायदे तय करेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को विधानसभा की अति-महत्वपूर्ण ‘नियम समिति’ (Rules Committee) में एक साथ जगह दी गई है।Rajasthan Politics

सियासी दिग्गजों का एक नया मंच
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी द्वारा शुक्रवार को 16 नई समितियों की घोषणा की गई। इस घोषणा में सबसे ज्यादा सुर्खियां इसी बात ने बटोरी हैं कि सूबे की सियासत के इन तीन मजबूत स्तंभों को एक ही टीम में पिरोया गया है। सदन कैसे चलेगा और प्रक्रियाओं में क्या बदलाव होंगे, यह तय करने वाली इस नियम समिति के पदेन अध्यक्ष खुद स्पीकर वासुदेव देवनानी होंगे। इस शक्तिशाली पैनल में श्रीचंद कृपलानी, हरीश चौधरी, चंद्रभान सिंह आक्या और दीप्ति किरण माहेश्वरी जैसे अन्य वरिष्ठ नेताओं को भी शामिल किया गया है। अब यह देखना वाकई रोचक होगा कि क्या ये दिग्गज पुरानी तल्खियां भुलाकर सहमति के साथ काम करेंगे या फिर समिति की बैठकों में भी सियासी चिंगारियां उठेंगी।

समितियों में भाजपा का दबदबा, विपक्ष को अहम पद
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शक्ति संतुलन की बात करें, तो गठित की गई 16 समितियों में सत्ताधारी दल का पलड़ा भारी है। कुल 11 समितियों की कमान भाजपा विधायकों के हाथों में सौंपी गई है, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के हिस्से में केवल 3 समितियों की अध्यक्षता आई है।

हालांकि, विपक्ष को कुछ बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को सरकारी खर्चों की ऑडिट करने वाली सबसे अहम ‘लोक लेखा समिति’ (PAC) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, कांग्रेस के राजेंद्र पारीक को ‘प्रश्न एवं संदर्भ समिति’ और नरेंद्र बुधानिया को ‘पिछड़ा वर्ग कल्याण समिति’ का जिम्मा सौंपा गया है। सूबे के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भी अहम भूमिका देते हुए ‘जनरल पर्पज कमेटी’ का सदस्य बनाया गया है।

महिला प्रतिनिधित्व पर उठे सवाल
समितियों के इस गठन में आधी आबादी यानी महिलाओं की भागीदारी निराशाजनक रही है। 16 समितियों में से मात्र एक की कमान महिला विधायक के पास है। भाजपा विधायक कल्पना देवी को ‘महिला एवं बाल कल्याण समिति’ का अध्यक्ष बनाया गया है, जो महिला विधायकों की कुल संख्या को देखते हुए बेहद कम माना जा रहा है।

सियासी संदेश और आगे की राह
इन सभी नवगठित समितियों का कार्यकाल अगले साल 31 मार्च तक रहेगा। इस दौरान ये समितियां सरकारी कामकाज की निगरानी और नीतियों की समीक्षा में अपनी भूमिका निभाएंगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गहलोत, पायलट और राजे का एक साथ आना महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह विधानसभा के भीतर टकराव के बजाय सकारात्मक संवाद और सहयोग स्थापित करने का एक बड़ा संदेश है। अब पूरे प्रदेश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सत्ता और विपक्ष के दिग्गजों का यह अनूठा ‘टीमवर्क’ धरातल पर कितना सफल हो पाता है।



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