

आपणी हथाई न्यूज, प्रदेश के मुखिया भजनलाल शर्मा (Bhajan Lal Sharma) की दिल्ली यात्रा के बाद राजस्थान की राजनीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। पांच राज्यों के चुनाव संपन्न होते ही सत्ता और संगठन के स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजधानी में हुई अहम बैठकों ने यह संकेत दिया है कि राज्य में जल्द ही राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने नितिन नबीन (Nitin Nabin) और बी एल संतोष ( B. L. Santhosh) से अलग-अलग मुलाकात कर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। इन बैठकों में मंत्रिमंडल विस्तार, बोर्डों और आयोगों में नियुक्तियां, प्राधिकरणों तथा अकादमियों में नए चेहरों को अवसर देने जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से सामने आए।
राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) सरकार का कार्यकाल अब ढाई वर्ष के करीब पहुंच चुका है। ऐसे में मंत्रिपरिषद विस्तार की चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। फिलहाल मंत्रिमंडल में कई पद रिक्त हैं, जिन्हें भरने के साथ-साथ कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की संभावना भी जताई जा रही है। पार्टी संगठन इस बार संतुलन के साथ नई पीढ़ी के नेताओं को आगे लाने की रणनीति पर काम करता दिखाई दे रहा है।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि राज्य के विभिन्न बोर्ड, आयोग और स्वायत्त संस्थाओं में लंबे समय से लंबित नियुक्तियों पर अब फैसला जल्द हो सकता है। संकेत मिल रहे हैं कि कुछ नामों को लेकर शीर्ष स्तर पर सहमति बन चुकी है और नियुक्तियों की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से शुरू हो सकती है।
इसी के साथ जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव ने भी सियासी समीकरणों को और दिलचस्प बना दिया है। राजस्थान से खाली होने वाली सीटों को देखते हुए संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन तेज है। पार्टी के भीतर यह भी माना जा रहा है कि महिला प्रतिनिधित्व को प्रमुखता देने की रणनीति के तहत इस बार किसी महिला चेहरे को आगे बढ़ाया जा सकता है।
इसके अलावा प्रदेश में आगामी पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर भी रणनीतिक चर्चा हुई है। माना जा रहा है कि संगठन इन चुनावों को केवल स्थानीय मुकाबला नहीं, बल्कि आगामी बड़े राजनीतिक समीकरणों की तैयारी के रूप में देख रहा है।


