

आपणी हथाई न्यूज, एक नई जिंदगी को जन्म देने की खुशियां उस वक्त मातम और खौफ में बदल गईं, जब बीकानेर के सबसे बड़े पीबीएम (PBM) अस्पताल के जनाना विंग में सी-सेक्शन (सिजेरियन) डिलीवरी के बाद एक के बाद एक 6 प्रसूताओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई। हालत इतनी गंभीर हो गई कि इन सभी महिलाओं की किडनी फेल हो चुकी है और वे आईसीयू में जीवन-मरण का संघर्ष कर रही हैं। आपको याद दिला दें कि ‘आपणी हथाई’ ने पिछले दिनों ही कोटा में हुए दर्दनाक हादसे के बाद प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में चल रही घोर लापरवाही और चरमराती व्यवस्थाओं को लेकर एक कड़ी चेतावनी दी थी। दुर्भाग्यवश, प्रशासन ने उस चेतावनी से कोई सबक नहीं लिया और अब वही खौफनाक इतिहास बीकानेर में दोहराया जा रहा है।

अस्पताल के जनाना विंग में 10 से 15 दिन पहले सी-सेक्शन सर्जरी करवाने वाली इन सभी 6 महिलाओं (जिनकी उम्र महज 20 से 27 साल के बीच है) को अचानक पेशाब आना बंद हो गया, प्लेटलेट्स तेजी से गिरने लगे और देखते ही देखते मल्टीपल ऑर्गन डिस्फंक्शन की नौबत आ गई। फिलहाल सभी मरीजों की डायलिसिस की जा रही है और उन्हें आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया है। इनमें से फलोदी निवासी 20 वर्षीय प्रीति की हालत बेहद नाजुक है और वह वेंटिलेटर पर सांसों की जंग लड़ रही है। आरोप है कि शुरुआत में अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर्स इस पूरे मामले पर लीपापोती करने और इसे छिपाने की कोशिश में जुटे रहे, लेकिन जब महिलाओं की हालत बिगड़ती गई, तो सिस्टम की पोल खुलकर सामने आ गई।
चिकित्सकों के बयान भी इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े कर रहे हैं। एचओडी डॉ. संतोष खजोतिया का कहना है कि किडनी फेल होने की वजह सिर्फ इन्फेक्शन नहीं, बल्कि अत्यधिक ब्लीडिंग भी हो सकती है। वहीं, एसपी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने यह माना है कि ऑपरेशन थियेटर (OT) में इन्फेक्शन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। डैमेज कंट्रोल करते हुए अब अस्पताल प्रशासन 90 सेकंड में इन्फेक्शन का पता लगाने वाली ‘इन्फेक्शन डिटेक्टर मशीन’ लगाने की बात कह रहा है। नेफ्रोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. जितेंद्र फलौदिया के अनुसार, एक महिला हेल्प सिंड्रोम (HELLP Syndrome) के कारण वेंटिलेटर पर है और पूरी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही असली कारणों का खुलासा हो सकेगा।
इस घटना ने एक बार फिर महीने भर पहले कोटा के मेडिकल कॉलेज में हुई उस भयानक त्रासदी की यादें ताजा कर दी हैं, जहाँ सिजेरियन डिलीवरी के बाद किडनी फेल होने से 5 प्रसूताओं की तड़प-तड़प कर मौत हो गई थी। एम्स दिल्ली की जांच रिपोर्ट में बाद में खुलासा हुआ था कि कोटा में ब्लीडिंग रोकने के लिए जो ‘ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन’ दिए गए थे, उनमें जरूरी घटक (Essential Components) ही नहीं थे। इसके बाद अमृतसर की एक दवा कंपनी का लाइसेंस रद्द किया गया था। अब बीकानेर में तारा देवी, शारदा, राहिला, इमरती और प्रीति जैसी युवतियों की बिगड़ती हालत (एक्यूट किडनी इंजरी, खून में इन्फेक्शन, फेफड़ों में पानी भरना) यह चीख-चीख कर पूछ रही है कि क्या यहाँ भी वही जानलेवा लापरवाही बरती गई है? 11 मई को ‘आपणी हथाई’ की प्रकाशित खबर में चेतावनी को नजरअंदाज करने वाला स्वास्थ्य विभाग आखिर कौनसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा था?


