


धर्मधारा आपणी हथाई न्यूज, जय जगन्नाथ के जयघोष, शंखनाद और घंटियों की मंगल ध्वनि के बीच बुधवार सुबह बीकानेर के करीब 200 वर्ष पुराने भगवान जगन्नाथ मंदिर में भक्तिभाव का अनुपम दृश्य देखने को मिला। स्नान पूर्णिमा के बाद 15 दिनों तक अनसर (एकांतवास) में रहने के पश्चात भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा ने नवयौवन स्वरूप में भक्तों को प्रथम दर्शन दिए। तड़के से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर के बाहर लग गईं और नव श्रृंगार में सजे तीनों विग्रहों के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार, विशेष पूजा-अर्चना और हवन के साथ रथयात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। पुजारियों ने बताया कि अनसर अवधि के दौरान आयुर्वेदिक परंपरा के अनुसार भगवान की विशेष सेवा की गई, जिसके बाद ओडिशा से मंगवाए गए आकर्षक वस्त्र और मुकुट धारण कराए गए। अब गुरुवार शाम 5:45 बजे महाआरती के बाद भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निज मंदिर से रवाना होगी। यात्रा कोटगेट, के.ई.एम. रोड और चौतीना कुआं होते हुए रत्न बिहारी पार्क स्थित रसिक शिरोमणि मंदिर पहुंचेगी। पूरे मार्ग में पुष्पवर्षा, आरती, भजन-कीर्तन और जयघोष के बीच हजारों श्रद्धालु भगवान के रथ को रस्सियों से खींचते हुए शामिल होंगे। भगवान नौ दिनों तक रसिक शिरोमणि मंदिर में विराजमान रहेंगे और 24 जुलाई को पुनः अपने निज मंदिर लौटेंगे।
200 साल पुरानी आस्था का उत्सव: बीकानेर में रथयात्रा से जुड़ी है चमत्कारी बारिश की मान्यता
भगवान जगन्नाथ मंदिर की वार्षिक रथयात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि बीकानेर की सांस्कृतिक पहचान और जनआस्था का प्रतीक भी है। लगभग दो शताब्दियों पुराने इस मंदिर से जुड़ी मान्यता आज भी श्रद्धालुओं के मन में गहरी आस्था जगाती है। कहा जाता है कि वर्षों पहले जब बीकानेर भीषण अकाल की चपेट में था, तब पुरी से भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा पैदल यात्रा कर यहां लाई गई। लोकविश्वास है कि प्रतिमा के नगर में प्रवेश करते ही लगातार तीन दिनों तक वर्षा हुई और सूखे से राहत मिली।
इस अद्भुत घटना को ईश्वरीय कृपा मानते हुए तत्कालीन महाराजा रतन सिंह ने मंदिर निर्माण के लिए भूमि दान की। तभी से यह मंदिर बीकानेर की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। हर वर्ष निकलने वाली रथयात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल होकर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों का स्वागत करते हैं। शहरभर में पुष्पवर्षा, भजन-कीर्तन और धार्मिक उल्लास के बीच यह आयोजन आस्था के साथ-साथ बीकानेर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी भव्य उत्सव बन जाता है।


