


Rajasthan आपणी हथाई न्यूज, लगभग दो महीने से राजस्थान में करीब 20 प्रसूताओं की मौत और 10 प्रसूताओं की किडनी फेल मामलें से चिकित्सा विभाग में हड़कम्प मचा हुआ है। इस बीच बुधवार को कोटा के मेडिकल कॉलेज अस्पताल से आई एक खबर ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। Rajasthan News
दरअसल, कोटा अस्पताल में भर्ती पांच प्रसूताओं में से चार आरती चौबदार, रागिनी मीणा, पिंकी और सुशीला ने मीडिया के सामने आकर अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए सरकार से इच्छामृत्यु की मांग की है। आपकों बता दे कि सिजेरियन प्रसव के बाद इन पांच प्रसूताओं की किडनी खराब हो चुकी है और लगातार दो माह से ये नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती है और इनका डायलिसिस हो रहा है।
प्रसूताओं का कहना है कि सरकार या तो किडनी ट्रांसप्लांट करवा दी नही तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए। बुधवार को प्रसूताओं ने राष्ट्रपति के नाम भेजे ज्ञापन में लिखा कि डायलिसिस के दौरान उन्हें भयंकर पीड़ा होती है । अब खबर ये भी सामने आई है कि इन पांचों प्रसूताओं ने डायलिसिस करवाने से इनकार कर दिया है।
दो दिन पूर्व इन प्रसूताओं के स्वजनों ने जिला कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन दिया था जिसमें सरकारी खर्च पर किडनी ट्रांसप्लांट की मांग की गई थी। वही सरकार द्वारा ऐसा नही करने की दशा में जहर का इंजेक्शन देने की भी बात सामने आई है।
दूसरी और चिकित्सा मंत्री चिकित्सा विभाग की प्रमुख सचिव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मंगलवार और बुधवार को उन जिलों में पहुंचे जहां पर प्रसुताओं की मौत हुई थी एक और अस्पतालों में पुरुषोत्तम की म्यूट का मामला लगातार जारी है वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा गठित जांच कमेटी ने अब तक अपनी अंतिम रिपोर्ट नहीं सौंप है इसके चलते सरकार पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के स्थान पर उन्हें बचाने के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रसूताओं की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग में मचे हड़कंप के बीच सरकार ने एक नई गाइडलाइन तय की है। जिसमें गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य मानकों की निरंतर स्क्रीनिंग होगी साथ ही स्वास्थ्य संबंधित महत्वपूर्ण जांच करने के साथ ही इनका रिकॉर्ड भी रखा जाएगा । इसके अलावा है हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की निगरानी भी अलग से की जाए।


