धर्मधारा आपणी हथाई न्यूज, श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना करना सर्वश्रेष्ट एवं अत्यंत पावन मास माना गया हैं। इस मास में श्रद्धा एवं विधि-विधान से किए गए रुद्राभिषेक से अल्प समय में मनोवांछित फल की प्राप्ति होती हैं तथा जन्मकुंडली में ग्रहजनित दोष, रोग, कष्ट एवं अनेक प्रकार की बाधाओं से शीघ्र मुक्ति मिलती हैं।
भगवान शिव सर्वकल्याणकारी देव हैं। उनकी पूजा-आराधना समस्त मनोरथों को पूर्ण करने वाली हैं। शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव की उपासना करने से भक्त की सभी मनोकामनाएँ शीघ्र पूर्ण होती हैं।
रुद्राभिषेक का अर्थ हैं भगवान रुद्र (शिव) का वैदिक रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों द्वारा शिवलिंग पर अभिषेक करना। यह पवित्र स्नान भगवान शिव के रुद्र स्वरूप को समर्पित होता हैं। यद्यपि अभिषेक के अनेक प्रकार हैं, लेकिन भगवान शिव को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम उपाय रुद्राभिषेक माना गया हैं। इसे स्वयं श्रद्धापूर्वक करना अथवा ब्राह्मणों द्वारा संपन्न कराना अत्यंत शुभ एवं फलदायी होता हैं।
भगवान शिव ने अपनी जटाओं में माँ गंगा को धारण किया हैं, इसलिए वे जलधाराप्रिय माने जाते हैं। शिव ही रुद्र हैं और रुद्र ही शिव हैं।
“रुतम् दुःखम्, द्रावयति नाशयतीति रुद्रः।”
अर्थात जो हमारे समस्त दुःखों का शीघ्र नाश कर दें, वही रुद्र हैं। वास्तव में मनुष्य जो दुःख भोगता हैं, उसका मुख्य कारण उसके अपने ही जाने-अनजाने में किए गए प्रकृति-विरुद्ध कर्म होते हैं। भगवान रुद्र की आराधना उन पापों एवं दोषों का क्षय कर जीवन में सुख, शांति और कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती हैं। शिवपुराण के अनुसार विभिन्न द्रव्यों से रुद्राभिषेक का फल :-
→ जल उत्तम वर्षा एवं समृद्धि की प्राप्ति ।
→ दूध – पुत्र प्राप्ति, मधुमेह रोग की शांति एवं मनोकामनाओं की सिद्धि ।
→ दही– पशुधन, भवन एवं वाहन की प्राप्ति ।
→ घृत (घी) वंशवृद्धि एवं पारिवारिक उन्नति ।
→ मधु(शहद), युक्त जल धन-वृद्धि
→ शर्करा (चीनी) अभिषेक सद्बुद्धि एवं विवेक की प्राप्ति।
→ गन्ने का रस माता लक्ष्मी की कृपा एवं धन-संपति ।
→ कुशोदक (कुशा मिश्रित जल) रोग एवं दुःखों से मुक्ति ।
→ तीर्थजल मोक्ष की प्राप्ति ।
→ इत्र मिश्रित जल – रोगों का नाश।
→ गंगाजल व नारियल जल ज्वर एवं रोगों से राहत ।
→ सरसों का तेल रोग एवं शत्रुओं का नाश।
इस प्रकार भगवान शिव के रुद्र स्वरुप का श्रद्धा एवं विधिपूर्वक अभिषेक करने से जाने-अनजाने में हुए पापों का क्षय होता हैं तथा साधक के भीतर ” सत्यम् शिवम् सुन्दरम् ” का दिव्य भाव जागृत होता हैं। भगवान शिव की कृपा से धन-धान्य, विद्या, संतान, यश, समृद्धि एवं समस्त मनोकामनाओं की प्राप्ति होती हैं।
पंडित ब्रज मोहन पुरोहित
9983826856


