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Bikaner : ऊभ-छठ आज,लक्ष्मीनाथ मंदिर में चंद्रोदय तक महिलाओं की रहेगी एंट्री, पुरुषों के प्रवेश पर रोक

Bikaner आपणी हथाई न्यूज,भाद्रपद मास के प्रमुख लोक पर्व ऊभ-छठ का पर्व बुधवार को बीकानेर में श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाएगा। अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और कुंवारी कन्याओं द्वारा सुयोग्य वर की कामना के लिए रखा जाने वाला यह व्रत बीकानेर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में खास महत्व रखता है।

लक्ष्मीनाथ मंदिर में रियासतकालीन परंपरा का होगा पालन

नगर सेठ श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर में ऊभ-छठ के अवसर पर वर्षों पुरानी परंपरा के तहत विशेष व्यवस्था रहेगी। श्री लक्ष्मीनाथ मंदिर विकास एवं पर्यावरण समिति के सचिव सीताराम कच्छावा के अनुसार बुधवार शाम 7:30 बजे से चंद्रोदय तक, यानी करीब रात 10:30 बजे तक, मंदिर और उससे जुड़े पार्क परिसर में पुरुष श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद रहेगा। इस दौरान केवल महिलाएं और कन्याएं ही मंदिर परिसर में प्रवेश कर सकेंगी।

समिति ने पुरुष श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे परंपरा का सम्मान करते हुए शाम 7:30 बजे से पहले अथवा चंद्रमा के दर्शन होने के बाद मंदिर में प्रवेश कर दर्शन करें।

सूर्यास्त से चंद्रोदय तक खड़ी रहकर करती हैं तप

ऊभ-छठ का सबसे खास विधान इसका नाम ही बताता है। इस व्रत में महिलाएं और कन्याएं सूर्यास्त के बाद से चंद्रमा के उदय होने तक बैठती नहीं हैं, बल्कि लगातार खड़ी रहकर भगवान का ध्यान करती हैं। इसी वजह से इसे ऊभ-छठ कहा जाता है।

कुंवारी कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति की कामना से, जबकि सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए निर्जल-निराहार रहकर यह कठिन व्रत करती हैं।

चंद्र दर्शन के बाद खुलेगा व्रत

रात करीब 10:30 बजे चंद्रमा के उदय होने के बाद व्रती महिलाएं दूध और जल से चंद्रमा को अर्घ्य देंगी। इसके बाद छलनी से चंद्र दर्शन और विधिवत पूजा-अर्चना कर व्रत का पारणा किया जाएगा। लक्ष्मीनाथ मंदिर में इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं और कन्याओं के पहुंचने की संभावना है।

जन्माष्टमी की भी तैयारियां पूरी

मंदिर के कथावाचक पंडित विजय शंकर व्यास और मुख्य पुजारी नरोत्तम सेवग ने बताया कि ऊभ-छठ के बाद 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भी मंदिर में भव्य रूप से मनाया जाएगा। जन्माष्टमी को लेकर मंदिर और पार्क परिसर में विशेष विद्युत सजावट की गई है। बीकानेर विकास प्राधिकरण की ओर से की गई रोशनी से मंदिर परिसर को आकर्षक रूप दिया गया है।



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