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Bikaner : दो साल आठ माह में बीकानेर से 1925 महिलाएं और युवतियां लापता, 231 का अब तक सुराग नहीं

Bikaner आपणी हथाई न्यूज, बीकानेर जिले में महिलाओं और युवतियों की गुमशुदगी के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। जनवरी 2024 से अगस्त 2026 तक करीब दो साल आठ माह की अवधि में बीकानेर जिले में कुल 1925 महिलाओं और युवतियों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई। इनमें 1623 महिलाएं और 302 युवतियां शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 1695 महिलाएं और युवतियां वापस मिल चुकी हैं, जबकि 230 मामलों में अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2024 में 559 महिलाओं के गुम होने की रिपोर्ट दर्ज हुई थी। इनमें 508 महिलाएं वापस मिल गईं, जबकि 51 का पता नहीं चला। वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 619 हो गई। इनमें 551 महिलाएं मिल गईं और 68 अभी भी लापता हैं। वहीं वर्ष 2026 में अगस्त तक 445 महिलाओं की गुमशुदगी दर्ज हुई, जिनमें 338 वापस मिल चुकी हैं, जबकि 107 महिलाओं का अभी तक पता नहीं चल पाया है। यानी इस साल अगस्त तक लंबित मामलों की संख्या पिछले दोनों पूरे वर्षों के मुकाबले अधिक है।

युवतियों के मामलों में भी पुलिस रिकॉर्ड अलग तस्वीर सामने रखता है। वर्ष 2024 में 106 युवतियों की गुमशुदगी दर्ज हुई, जिनमें 105 को पुलिस तलाश के बाद वापस लाया गया और एक युवती का पता नहीं चल सका। वर्ष 2025 में 107 युवतियां लापता हुईं और सभी को बरामद कर लिया गया। वर्ष 2026 में अगस्त तक 89 युवतियों की गुमशुदगी दर्ज हुई, जिनमें 86 वापस मिल चुकी हैं, जबकि तीन का अभी पता नहीं चला है।

पुलिस के सामने चुनौती केवल गुमशुदा लोगों को तलाशने तक सीमित नहीं है। पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा के अनुसार गुमशुदगी के मामले चिंताजनक हैं। पुलिस कानून के दायरे में रहते हुए परिजनों से समन्वय कर गुमशुदा महिलाओं और युवतियों की तलाश करती है। कई मामलों में पुलिस को सफलता मिलती है, लेकिन कुछ मामलों में तलाश लंबी हो जाती है। उनके अनुसार महिलाओं और युवतियों के घर छोड़ने के पीछे की परिस्थितियों को समझने के लिए परिवार और समाज को भी गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

गुमशुदगी के सभी मामलों की वजह एक जैसी नहीं होती। पुलिस जांच में कई बार पारिवारिक विवाद, प्रेम संबंध, विवाह को लेकर मतभेद या बिना बताए घर छोड़ने जैसी परिस्थितियां सामने आती हैं। कुछ मामलों में बहकावे में आकर घर से जाने की बात भी सामने आती है। वापस लौटने के बाद भी कई महिलाओं और युवतियों को पारिवारिक एवं सामाजिक स्तर पर अलग-अलग परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

इन आंकड़ों का एक सकारात्मक पक्ष यह है कि गुमशुदगी दर्ज होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां वापस मिल जाती हैं। लेकिन जिन मामलों में लंबे समय तक कोई जानकारी नहीं मिलती, उनमें परिवारों का इंतजार लगातार बना रहता है। ऐसे में गुमशुदगी के आंकड़े केवल पुलिस रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं, बल्कि उन परिवारों की चिंता और उम्मीद की कहानी भी हैं, जो अपने परिजनों की वापसी का इंतजार कर रहे हैं।

 



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