Bikaner आपणी हथाई न्यूज,बीकानेर संभाग में वन भूमि के दोहरे आवंटन और रिकॉर्ड में गड़बड़ियों को लेकर प्रशासन और वन विभाग ने अब तक की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। संभाग के तीन जिलों में करीब 21,486 बीघा वन भूमि के दोहरे आवंटन को रद्द कर इसे वापस वन विभाग के कब्जे में लेने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके लिए वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर जमीन का सर्वे कर रही हैं और संबंधित किसानों को भूमि से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
दोहरे आवंटन के मामलों में कुल 1,119 किसान कार्रवाई के दायरे में आए हैं। वन विभाग की टीमें प्रभावित किसानों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर उन्हें भूमि के स्वामित्व, आवंटन और कब्जे से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दे रही हैं। संभाग की कुल 21,486 बीघा दोहरे आवंटन वाली भूमि में सबसे बड़ा हिस्सा बीकानेर जिले की चार तहसीलों—छत्तरगढ़, खाजूवाला, पूगल और कोलायत का है। इन चार तहसीलों में करीब 18,782 बीघा वन भूमि 981 किसानों को आवंटित की गई थी। इसके अलावा श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिले की जमीन भी इस मामले में शामिल है।
वन भूमि से जुड़े इन विवादित मामलों के समाधान के लिए प्रकरण राज्य सरकार की ओर से गठित जिला विशेष जांच दल (एसआईटी) और गवर्नमेंट लैंड म्यूटेशन एडवाइजरी कमेटी के सामने रखे गए थे। एसआईटी की जांच के बाद अब प्रशासन और वन विभाग ने जमीनी स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके तहत ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड को दुरुस्त करने के साथ ही गलत और दोहरे आवंटन को निरस्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
छत्तरगढ़ वन मंडल के डीएफओ दिलीप सिंह राठौड़ के अनुसार वन भूमि का मौके पर सर्वे कराया जा रहा है। जिन किसानों की ओर से भूमि से संबंधित आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा रहे हैं, उन्हें नियमानुसार बेदखली के नोटिस जारी किए जा रहे हैं। हालांकि जिन किसानों के पास वैध दस्तावेज हैं, उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा रहा है।
वन रेंज कार्यालय या तहसीलदार के समक्ष जमा करा सकेंगे दस्तावेज
प्रभावित किसानों को अपनी भूमि से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है। किसान स्वामित्व, आवंटन और अन्य संबंधित प्रमाण-पत्र संबंधित वन रेंज कार्यालय या तहसीलदार के समक्ष जमा करा सकते हैं। दस्तावेजों की जांच और रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। यानी अंतिम रूप से बेदखली या आवंटन निरस्तीकरण से पहले उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड का परीक्षण किया जाएगा।
65,400 बीघा वन भूमि ऑनलाइन जमाबंदी से गायब
संभाग में वन भूमि से जुड़ी समस्या केवल दोहरे आवंटन तक सीमित नहीं है। रिकॉर्ड की जांच में करीब 65,400 बीघा वन भूमि ऐसी भी सामने आई है, जो राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होने के बावजूद ऑनलाइन जमाबंदी में दिखाई नहीं दे रही है और अराजीराज के रूप में प्रदर्शित हो रही है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा पूगल तहसील का है, जहां करीब 40,300 बीघा, खाजूवाला में 17,900 बीघा और छत्तरगढ़ में करीब 7,200 बीघा वन भूमि शामिल बताई गई है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तेज हुई कार्रवाई
वन भूमि से जुड़े इन मामलों में कार्रवाई टी.एन. गोदावर्मन बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के 15 मई 2025 के निर्देशों के बाद तेज हुई है। शीर्ष अदालत के निर्देशों के अनुपालन में राज्य सरकार ने जिलों में विशेष जांच दल गठित किए हैं। इनका उद्देश्य आरक्षित वन भूमि पर हुए अवैध कब्जों और गलत आवंटनों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करना है। अब एसआईटी की जांच के आधार पर बीकानेर संभाग में दोहरे आवंटन वाली हजारों बीघा जमीन को वापस लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।


