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कोरोना के संकट से निकाय चुनाव की चौखट तक : महावीर रांका की सक्रियता ने फिर बढ़ाई सियासी चर्चा

आपणी हथाई न्यूज,बीकानेर नगर निगम चुनाव 2026 की तस्वीर धीरे-धीरे ही सही पर आने वाले समय में और अधिक स्पष्ट होने लगेगी। बात करें भारतीय जनता पार्टी के भीतर चल रहे महापौर पद को लेकर संभावित दावेदारों की तो पिछले दो-तीन दिनों से एक नाम ऐसा भी सामने आया है जिसको लेकर शहर में चर्चाएं हैं इतना ही नहीं अब इस नाम पर सहमति के साथ लोग बीजेपी में मेयर के प्रमुख दावेदार के रूप मे इस नाम की हामी तक भर रहे हैं।

भाजपा पार्टी से जुड़ी इन चर्चाओं में पूर्व यूआईटी चेयरमैन और भाजपा नेता महावीर रांका का नाम लगातार प्रमुखता से सामने आ रहा है। हालांकि पार्टी स्तर पर अंतिम फैसला अभी बाकी है, लेकिन रांका की राजनीतिक सक्रियता और लंबे समय से जारी सामाजिक सरोकारों के चलते उनकी दावेदारी को नजरअंदाज करना आसान नहीं माना जा रहा।

रांका की राजनीतिक पहचान केवल संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित नहीं रही है। कोरोना महामारी के दौरान बीकानेर में ऑक्सीजन की भारी किल्लत के बीच उनके नेतृत्व में रामलाल सूरजदेवी रांका चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से ऑक्सीजन बैंक संचालित किया गया। उस दौरान जरूरतमंदों को ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने के साथ ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, भोजन पैकेट, मास्क और सैनिटाइजर जैसी सहायता भी उपलब्ध कराई गई। कोविड काल में मरीजों और उनके परिजनों तक प्रतिदिन हजारों पैकेट भोजन पहुंचाने का काम भी महावीर रांका द्वारा किया गया।

ऑक्सीजन संकट के दौरान रांका की ओर से जरूरतमंद मरीजों के लिए ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के बाद तो रांका कोरोना काल के महा वीर बन गए। यही दौर उनकी सार्वजनिक छवि में सेवा और संकट के समय सक्रिय रहने वाली राजनीतिक पहचान को मजबूत करने वाला माना जाता है।

रांका क्यों है सब पर भारी!
रांका के पक्ष में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक तथ्य यह भी है कि वे पहले बीकानेर यूआईटी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इस अनुभव के चलते शहरी विकास, प्रशासनिक तंत्र और स्थानीय निकायों की कार्यप्रणाली से उनकी परिचितता को उनकी संभावित दावेदारी का एक आधार माना जा सकता है। वही रांका की पार्टी में उनके समकक्ष इस पद के लिए ऐसा कोई दावेदार नजर नही आता जिसको इतना अनुभव हो। दूसरी ओर महापौर पद तक पहुंचने के लिए उन्हें केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता ही नहीं बल्कि पार्टी के भीतर टिकट चयन, वार्ड का राजनीतिक समीकरण और पार्षदों के बीच बनने वाले समर्थन जैसे कई स्तरों से गुजरना होगा।

भाजपा के सामने भी इस चुनाव में अधिक दावेदारों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती रहेगी। ऐसे में रांका की सबसे बड़ी ताकत उनका पुराना संगठनात्मक संपर्क, यूआईटी का अनुभव और कोरोना काल से जुड़ी सेवा गतिविधियों की सार्वजनिक स्मृति हो सकती है, जबकि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के भीतर अन्य संभावित दावेदारों के राजनीतिक समीकरण और चुनावी रणनीति होगी।

दिलचस्प बात यह है कि रांका की राजनीति का आधार केवल चुनावी मौसम में दिखाई देने वाली सक्रियता नहीं रहा है। कोरोना काल के बाद भी सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी मौजूदगी बनी रही। इसी वजह से 2026 के निकाय चुनाव में उनका नाम महापौर पद की संभावित दौड़ से जोड़कर देखा जा रहा है।

फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। वार्डवार आरक्षण, उम्मीदवार चयन और भाजपा की अंतिम रणनीति के बाद ही यह तय होगा कि महावीर रांका पार्षद के रास्ते महापौर पद की दौड़ में कितनी मजबूती से उतरते हैं। लेकिन इतना जरूर है कि निकाय चुनाव की सियासी बिसात बिछने के साथ रांका का नाम उन नेताओं में शामिल हो गया है, जिनकी अगली राजनीतिक चाल पर बीकानेर की नजर रहेगी।



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