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पुण्यतिथि विशेष : बीकानेर के वो निडर जननायक ‘गुरुजी’, जिनके भाषणों से सत्ता के माथे पर आ जाता था पसीना : पढें पूरी खबर

आपणी हथाई न्यूज, बीकानेर की माटी ने कई नेताओं को जन्म दिया है, लेकिन जब बात शोषितों, मजदूरों और आम आदमी के हकों की आती है, तो पंडित गोकुल प्रसाद पुरोहित का नाम सबसे ऊपर आता है। आज उनकी पुण्यतिथि पर शहर याद कर रहा है उस फक्कड़ और जुझारू नेता को, जिनके कद्दावर व्यक्तित्व के आगे तत्कालीन मुख्यमंत्री भी नतमस्तक रहते थे और उन्हें ‘गुरुजी‘ कहकर संबोधित करते थे।

बंगाल से लेकर राजस्थान तक क्रांति की लौ
पं. शिवरतन जी पुरोहित के घर कलकत्ता (अब कोलकाता) में जन्मे गोकुल प्रसाद ने बचपन से ही क्रांति का ऊर्जस्वी वातावरण देखा। छोटी उम्र में ही वे स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े। उन्होंने उग्र किसान नेता स्वामी सहजानंद सरस्वती और काले पानी की सजा काट चुके योगेश शुक्ल से प्रेरणा ली। बाद में राजस्थान लौटकर उन्होंने माणिक्यलाल वर्मा, मोहनलाल सुखाड़िया और रमेश चन्द्र व्यास के साथ स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई। मेवाड़ में सामंतों और जागीरदारों के अत्याचारों के खिलाफ उन्होंने किसानों को एकजुट कर ऐतिहासिक संघर्ष किया।

मजदूरों के मसीहा और जेल की यातनाएं
उनकी राजनीति महलों या हवेलियों तक सीमित नहीं थी; वह खेत-खलिहानों, कारखानों और सड़कों पर बसती थी। बीकानेर के जामसर में जिप्सम मजदूरों के हकों के लिए भूख हड़ताल कर 48 मांगें मनवाना हो या राजस्थान नहर के कामगारों को विशेष भत्ते दिलाना, वे हमेशा अग्रिम मोर्चे पर रहे। 1975 के आपातकाल की विकट परिस्थितियों में भी वे चुप नहीं बैठे। ऊन मिल की तालाबंदी का विरोध करने पर उन्हें ‘मीसा’ (आंतरिक सुरक्षा अधिनियम) के तहत गिरफ्तार किया गया और 9 महीने तक जेल की यातनाएं सहीं। वे इंटक (INTUC) के प्रथम प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहे।

बीकानेर के विकास के शिल्पी
सन् 1962 से 1972 तक विधायक रहे पं. पुरोहित ने बीकानेर के विकास की नई इबारत लिखी। यह उनके ही अथक प्रयास थे कि राजस्थान नहर परियोजना का कार्यालय बीकानेर लाया गया। बीकानेर के कॉलेजों में एल.एल.एम., एम.एड. और एम.एस.सी. की कक्षाएं शुरू करवाना, स्टेट ऊन मिल की स्थापना और पुष्करणा स्टेडियम का निर्माण उनके उन अमर कार्यों में से हैं, जिनका लाभ आज भी जनता उठा रही है। भीषण अकाल के समय वे तत्कालीन केंद्रीय वित्तमंत्री मोरारजी देसाई को हाथ पकड़कर बीकानेर ले आए थे, ताकि वे जमीनी हकीकत देख सकें।

अपनी ही पार्टी से भिड़ने का माद्दा
उनकी आवाज की बुलंदी और बेबाकी ऐसी थी कि विधानसभा में वे अपनी ही सत्ताधारी पार्टी (कांग्रेस) की गलत नीतियों का डटकर विरोध करते थे। पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत ने एक बार उनके लिए कहा था कि, “सदन को गोकुल प्रसाद के रूप में एक ऐसा सदस्य मिला था जो सत्तापक्ष या विरोधी पक्ष को निडर होकर अपनी बात कहता था।” वहीं, कॉमरेड श्योपत सिंह ने भी माना था कि जब गोकुल जी बोलते थे, तो तत्कालीन मुख्यमंत्री सुखाड़िया जी के माथे पर भी पसीने की बूंदें छलक आती थीं।

जाति-बिरादरी से ऊपर उठकर हर धर्म और वर्ग के लोगों के चहेते रहे पं. गोकुल प्रसाद पुरोहित का सम्पूर्ण जीवन शोषितों के प्रति समर्पित रहा। आज उनकी पुण्यतिथि पर पूरा शहर इस महान जनसेवक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।

 



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