Homeराजस्थानVikas Divyakirti को मिला अजमेर कोर्ट का समन, मानहानि का है मामला

Vikas Divyakirti को मिला अजमेर कोर्ट का समन, मानहानि का है मामला

Vikas Divyakirti: IAS कोचिंग जगत की जानी-मानी हस्ती डॉ. विकास दिव्यकीर्ति एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह है उनका एक विवादित वीडियो, जिसे लेकर अजमेर की अदालत में उनके खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज की गई है। अब उन्होंने इस मामले में राहत पाने के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

इस दौरान हाई कोर्ट में याचिका लगाते हुए उन्होंने अधीनस्थ न्यायालय में दायर उस मानहानि की याचिका को खारिज करने की मांग की है। दिव्य कीर्ति की याचिका पर यह मामला उच्च न्यायालय में 21 जुलाई को सूचीबद्ध किया गया है और हाई कोर्ट के जस्टिस समीर जैन इसकी सुनवाई करेंगे।

जबकि अजमेर कोर्ट में उन्हें 21 जुलाई को पेश होने के लिए कहा गया है। विकास दिव्यकीर्ति के खिलाफ यह शिकायत एक वीडियो को लेकर की गई है जिसमें उनके द्वारा कथित तौर पर न्याय व्यवस्था और न्यायपालिका के कामकाज के बारे में कुछ व्यंग्यात्मक टिप्पणियां की गई थीं।

इस मामले को लेकर एक वकील कमलेश मंडोलिया ने अजमेर की अदालत में याचिका दायर की थी, जिसके बाद यह मामला सामने आया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस दौरान उन्होंने न्यायपालिका का मजाक उड़ाया था।

दिव्यकीर्ति की ओर से अधिवक्ता सुमीर सोढ़ी ने अजमेर न्यायालय में तर्क दिया कि मानहानि का कोई भी मामला नहीं बनता है और मामले को खारिज कर दिया जाना चाहिए। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए स्थानीय अदालत ने विकास दिव्यकीर्ति को 22 जुलाई को तलब किया है।

इससे पहले डॉ दिव्यकीर्ति के खिलाफ बीएनएस की धारा 353(2), 356(2),(3), और धारा 66ए (बी) आईटी अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज की गई थी। जिस वीडियो के संबंध में शिकायत दर्ज की गई है, उसका टाइटल, ‘IAS vs Judge: कौन ज्यादा ताकतवर’ है।

मामले को आपराधिक रजिस्टर में दर्ज करने का निर्देश देते हुए कोर्ट ने दिव्यकीर्ति को अगली सुनवाई की तारीख पर उपस्थित होने को कहा है। उल्लेखनीय है कि बीएनएस की धारा 356 मानहानि से संबंधित है।

अजमेर की अदालत ने आगे कहा कि न्यायपालिका का उपहास किया गया है, जिससे न्यायपालिका से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा, निष्पक्षता और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। साथ ही न्यायपालिका की छवि और विश्वसनीयता धूमिल हुई है।

कोर्ट ने कहा कि आम जनता में न्यायपालिका के प्रति भ्रम, अविश्वास और संदेह की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए शिकायतकर्ता कमलेश मंडोलिया की ओर से दायर शिकायत स्वीकार की जाती है और आरोपी विकास दिव्यकीर्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, 2023 की धारा 356 (1) (2), (3) (4) के तहत अपराध का संज्ञान लिया जाता है। Vikas Divyakirti



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