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Bikaner Crime : पापड़ बेलने वाला निकला शातिर फ्रॉड, लोगों को वर्कफोर्म होम और डिस्काउंट का लालच देकर करता था ठगी, हुआ गिरफ्तार

आपणी हथाई न्यूज, डिजिटल ठगी और साइबर क्राइम के खिलाफ बीकानेर पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। जिला पुलिस की स्पेशल टीम ‘म्यूल हंटर’ ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग गिरोह के सक्रिय सदस्य को धर दबोचा है। पुलिस की गिरफ्त में आया यह आरोपी सीधे-साधे लोगों को बहला-फुसलाकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था और फिर उन खातों को साइबर अपराधियों को 10% कमीशन पर बेच देता था।

पापड़ बेलने वाला ऐसे बना ‘साइबर क्रिमिनल’
​पकड़ा गया आरोपी लोकेश पड़िहार (पुत्र नेमचंद पड़िहार), जो मूल रूप से रानीसर बास का रहने वाला है, करीब 7-8 महीने पहले तक पापड़ की लोइयाँ बांटने का साधारण काम करता था। इसी दौरान वह लालच में आकर एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग गिरोह के संपर्क में आ गया। गिरोह के सदस्यों ने उसे हर खाते पर मोटा कमीशन देने का लालच दिया, जिसके बाद उसने अपनी जिंदगी का रास्ता ही बदल लिया।

​ऐशो-आराम और खर्चीली लाइफस्टाइल ने खोला राज
​आरोपी ने महज 7-8 महीनों के भीतर इन फर्जी खातों के जरिए 20 लाख रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दे डाला। अचानक आए इस काले धन के बाद आरोपी का रहन-सहन और लाइफस्टाइल पूरी तरह बदल गई। वह बेहद खर्चीली जिंदगी जीने लगा। उसकी इस अचानक बदली जीवनशैली पर पुलिस को शक हुआ। पुलिस टीम ने करीब एक हफ्ते तक उसकी हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी और शक सही साबित होने पर उसे दबोच लिया।

वर्क फ्रॉम होम और डिस्काउंट टास्क के नाम पर लूट
​पुलिस पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह आम लोगों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ (घर बैठे काम) और ‘डिस्काउंट टास्क’ जैसे लुभावने झांसे देकर जाल में फंसाता था। ठगी की गई भारी-भरकम राशि को लोकेश द्वारा उपलब्ध कराए गए अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवाया जाता था, जिसे बाद में निकाल कर गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। इस नेटवर्क के तार देश के कई राज्यों से जुड़े हुए हैं।

ऐसे हुई कार्रवाई (पुलिस टीम)
​पुलिस अधीक्षक (SP) मृदुल कच्छावा के निर्देश और ASP सिटी चक्रवर्ती सिंह राठौड़ व एसपी किरण गोदारा के सुपरविजन में एक विशेष ‘साइबर रिस्पॉन्स सेल’ का गठन किया गया था। साइबर थाना प्रभारी शालिनी बजाज के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया। इस कामयाब टीम में पुलिस निरीक्षक रमेश सर्वटा, एएसआई ओमप्रकाश और सिपाही रामधन व सुभाष शामिल रहे।



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