


आपणी हथाई न्यूज, साइबर ठगों के जाल में अब बीकानेर के परकोटा क्षेत्र के युवा भी फंसकर शहर की साख पर बट्टा लगा रहे हैं। ताजा मामला फतेहाबाद (हरियाणा) की साइबर थाना पुलिस की कार्रवाई से सामने आया है, जिसमें बीकानेर के लाखोटियों चौक निवासी वेदप्रकाश छंगाणी पुत्र लक्ष्मीकांत निवासी सेला महाराज की गली,लखोटिया चौक को गिरफ्तार किया गया है। इस शातिर ने मुंबई साइबर सेल का फर्जी अधिकारी बनकर एक रिटायर्ड वीएलडीए (VLDA) कर्मचारी लेखराज को अपनी बातों के जाल में ऐसा उलझाया कि बेचारा बुजुर्ग अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी गंवा बैठा। ठगों ने पीड़ित को डराया कि उसके आधार कार्ड पर एक फर्जी बैंक खाता खुला है, जिसका इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों (Terror Funding) में हो रहा है। पड़ताल में सामने आया कि आरोपियों ने पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए आरबीआई (RBI) के नाम का एक फर्जी लेटर तक व्हाट्सएप पर भेज दिया था, जिससे रिटायर्ड कर्मचारी बुरी तरह घबरा गया।
ठगी का यह पूरा खेल नवंबर 2025 की शुरुआत में रचा गया था। ‘डिजिटल अरेस्ट’ और कानूनी कार्रवाई के खौफ में आए पीड़ित लेखराज को आरोपियों ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए चौबीसों घंटे निगरानी में रखा। महज 4 दिनों के भीतर (7 से 11 नवंबर के बीच) अपनी गाढ़ी कमाई के 13 लाख 5 हजार रुपये ठगों द्वारा बताए गए अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए। पीड़ित ने आरटीजीएस (RTGS) और एनईएफटी (NEFT) के जरिए यह भारी-भरकम राशि भेजी। हद तो तब हो गई जब इतनी बड़ी रकम ऐंठने के बाद भी ठगों की भूख शांत नहीं हुई और वे लगातार और पैसों की डिमांड करने लगे। जब राशि वापस मिलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आई और दबाव बढ़ता गया, तब जाकर लेखराज को ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने साइबर पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करवाई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए फतेहाबाद साइबर थाना प्रभारी राहुल देव ने तकनीकी साक्ष्यों (IP एड्रेस और बैंक ट्रांजेक्शन) को खंगाला और सुराग जुटाते हुए बीकानेर में दबिश दी। पुलिस ने आरोपी वेदप्रकाश को उसके ठिकाने से दबोच लिया और कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। गौरतलब है कि इस मामले में पुलिस दो आरोपियों को पहले ही सलाखों के पीछे पहुंचा चुकी है, जिनसे पूछताछ में वेदप्रकाश का नाम सामने आया था। ‘आपणी हथाई’ बीकानेर की जनता से पुरजोर अपील करता है कि किसी भी अनजान व्हाट्सएप वीडियो कॉल या ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी धमकियों से कतई न डरें। कोई भी असली पुलिस अधिकारी या सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर बयान दर्ज नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है। अगर आपके पास भी ऐसी कोई संदिग्ध कॉल आए, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें।


