


आपणी हथाई बीकानेर न्यूज, अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के लिए विश्व विख्यात ‘संस्कृति के शहर’ बीकानेर में रम्मत लोक नाट्य परंपरा को जीवित रखने के लिए एक विशेष मुहिम शुरू की गई है। हाल ही में जारी एक सार्वजनिक ‘आह्वान’ के जरिए शहरवासियों, विशेषकर युवाओं से इस विरासत को सहेजने का आग्रह किया गया है।
सांस्कृतिक विरासत पर संकट लेखिका आकांक्षा पुरोहित के विचारों के माध्यम से यह बात सामने रखी गई है कि वर्तमान में युवा पीढ़ी का अपनी संस्कृति से जुड़ाव कम हो रहा है। यदि आज युवा वर्ग रम्मत के मंचन में बढ़-चढ़कर भाग नहीं लेगा, तो आने वाली दो-तीन पीढ़ियों के बाद यह अनमोल विरासत केवल इतिहास के पन्नों तक सिमट कर रह जाएगी।
क्यों जरूरी है रम्मत का संरक्षण?
पोस्टर में रम्मत के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया गया है कि यह न केवल लोक संस्कृति और स्थानीय बोलियों के संरक्षण का माध्यम है, बल्कि लोक नृत्य और लोकगीतों को भी जीवंत रखता है। इसके अलावा, रम्मत को सामाजिक-राजनीतिक चेतना का एक सशक्त मंच और सीखने का एक सुगम माध्यम माना गया है।
युवाओं और समाज के लिए मार्गदर्शिका
समाज से अपील की गई है कि युवा उस्तादों के निर्देशन में अपनी भूमिकाएं निभाएं। रम्मतों को आपसी राजनीतिक या पारिवारिक अखाड़ा न बनने दें। इसे केवल एक औपचारिकता न मानकर गौरव के साथ अपनाएं। माताओं से भी आग्रह किया गया है कि वे बच्चों को बचपन से ही अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक करें। यह स्पष्ट किया गया है कि रम्मत किसी एक परिवार की नहीं बल्कि पूरे समाज की धरोहर है। जाति-पाति से ऊपर उठकर इस विरासत (थाती) को बचाना हर बीकानेरी का कर्तव्य है।


