

आपणी हथाई न्यूज, बीकानेर की ऐतिहासिक रियासतकालीन परंपराओं का निर्वाह करते हुए आज से होली के उल्लास का विधिवत आगाज हो रहा है। शाकद्वीपीय मग ब्राह्मण समाज द्वारा 23 फरवरी को ‘खेलनी सप्तमी’ का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। शहर के पवनपुरी क्षेत्र स्थित मां नागणेचीजी मंदिर में आज विशेष पूजा-अर्चना, भव्य श्रृंगार और आरती का आयोजन होगा, जिससे पूरे वातावरण में भक्ति और उत्सव का रंग घुल जाएगा।
इस उत्सव की खास बात यह है कि समाज के लोग देवी मां के चरणों में इत्र और गुलाल अर्पित कर होली खेलने की अनुमति मांगने की प्राचीन रस्म निभाएंगे। इसके साथ ही मंदिर परिसर में फागोत्सव शुरू हो जाएगा और हवा में उड़ती गुलाल ‘होळका’ के आगमन का संकेत देगी। आज से अगले आठ दिनों तक सभी मांगलिक कार्यों पर निषेध लग जाएगा और शहर पूरी तरह फागुन के रंगों में डूब जाएगा।
पारंपरिक गेर और महाप्रसाद का आयोजन
उत्सव की निरंतरता में देर शाम समाज द्वारा पारंपरिक गेर निकाली जाएगी। यह गेर गोगागेट से प्रारंभ होकर शहर के विभिन्न भीतरी क्षेत्रों जैसे बागड़ी मोहल्ला, भुजिया बाजार, चाय पट्टी, नइयों की गली और मरुनायक चौक से होते हुए मूंधड़ा सेवगों के चौक में संपन्न होगी।
इसके साथ ही, समाज के विभिन्न स्थानों जैसे श्यामोजी वंशज मूंधड़ा प्रन्यास भवन, हंसावतों की तलाई और जस्सोलाई स्थित जनेश्वर भवन में सामूहिक महाप्रसाद के आयोजन भी किए जाएंगे। बीकानेर की यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह आपसी भाईचारे और लोक संस्कृति के जीवंत रंगों को भी प्रदर्शित करती है।


