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Bikaner : शिक्षा विभाग की लापरवाही से छात्रों का भविष्य संकट में, आरबीएसई रीटोटलिंग में सामने आई बड़ी गड़बड़ी, मामला शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री तक पहुंचा

आपणी हथाई न्यूज, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (आरबीएसई) की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। 12वीं बोर्ड परीक्षा की रीटोटलिंग प्रक्रिया में सामने आई गंभीर लापरवाही ने न केवल शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को भी अंधकारमय बना दिया है। बीकानेर के एक छात्र ने आरोप लगाया है कि फिजिक्स विषय की उत्तर पुस्तिका में अंकों के जोड़ में सीधी गलती की गई, जिसके कारण उसे वास्तविक अंक से कम नंबर दे दिए गए।

जानकारी के अनुसार छात्र को शुरुआत में फिजिक्स विषय में 14 अंक दिए गए थे। छात्र को अपने प्रदर्शन पर भरोसा होने के चलते उसने रीटोटलिंग के लिए आवेदन किया। रीटोटलिंग के बाद बोर्ड ने अंक बढ़ाकर 15 कर दिए, लेकिन जब आधिकारिक उत्तर पुस्तिका की कॉपी छात्र के पास पहुंची तो उसमें कुल अंक 16 बनते दिखाई दिए। छात्र का आरोप है कि बोर्ड स्तर पर साधारण टोटलिंग तक सही तरीके से नहीं की गई।

मामले को और गंभीर तब माना जा रहा है जब छात्र ने बताया कि उत्तर पुस्तिका प्राप्त करने से पहले वह लगातार बोर्ड की हेल्पलाइन पर संपर्क कर यह जानने की कोशिश करता रहा कि उसकी कॉपी अभी तक क्यों नहीं आई, लेकिन विभाग की ओर से किसी ने फोन तक नहीं उठाया। इससे छात्र और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

छात्र ने यह भी आरोप लगाया कि जब उसने इस गलती के खिलाफ ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करने का प्रयास किया तो बोर्ड का पोर्टल भी काम नहीं कर रहा था। पोर्टल की तकनीकी खामी का स्क्रीन रिकॉर्डिंग वीडियो भी छात्र द्वारा सुरक्षित रखा गया है। छात्र का कहना है कि यदि बोर्ड स्तर पर इतनी लापरवाही हो रही है तो यह केवल एक छात्र का मामला नहीं बल्कि प्रदेशभर के हजारों विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ है।

पीड़ित छात्र दिशांक मोदी पुत्र नारायण मोदी निवासी मुक्ता प्रसाद कॉलोनी ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टैग करते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। छात्र का कहना है कि उसकी मार्कशीट में तुरंत सुधार किया जाए, दोषी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई हो तथा सभी विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की निष्पक्ष दोबारा जांच कराई जाए।

छात्र ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वह राजस्थान हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर मानसिक उत्पीड़न, मुकदमे के खर्च और उचित हर्जाने की मांग करेगा। इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा विभाग की पारदर्शिता और बोर्ड परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।



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