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Bikaner: निगम की लापरवाही से खुले नाले में गिरे बुजुर्ग की हुई थी मौत, अब परिवार को मिलेगा मुआवजा

Bikaner आपणी हथाई न्यूज, बीकानेर में खुले नाले में गिरने से हुई 62 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के मामले में स्थायी लोक अदालत ने नगर निगम को जिम्मेदार माना है। अदालत ने नगर निगम को मृतक के तीन वारिसों को कुल 3 लाख रुपए मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही 1 अगस्त 2023 से 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 10 हजार रुपए परिवाद व्यय का भुगतान करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मामला जस्सूसर गेट के बाहर सूरज बालबाड़ी स्कूल के पास रहने वाले पोकरराम जाट की मौत से जुड़ा है। पोकरराम अपने पैतृक गांव पलाना में पारिवारिक समारोह में शामिल होने गए थे। वहां से बाइक पर वापस बीकानेर लौटते समय पाबूबारी के पास खुले गंदे पानी के नाले में बाइक समेत गिर गए।

रास्ते से गुजर रहे लोगों ने नाले में बाइक पड़ी देखी तो उन्हें दुर्घटना की आशंका हुई। तलाश करने पर पोकरराम नाले के पानी में डूबे मिले। लोगों ने उन्हें बाहर निकाला और उपचार के लिए पीबीएम अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

खुले नाले पर नहीं लगाया था कोई सुरक्षा संकेत

पोकरराम की पत्नी रुकमा देवी जाट और पुत्रियां प्रियंका जाट व महिमा जाट की ओर से नगर निगम तथा यूआईटी के खिलाफ स्थायी लोक अदालत में परिवाद पेश किया गया था। परिवाद में आरोप लगाया गया कि जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां नाला खुला पड़ा था और दुर्घटना से बचाव के लिए किसी प्रकार का सुरक्षा संकेत या चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगाया गया था।

परिजनों का कहना था कि खुले नाले की जानकारी नगर निगम और यूआईटी के अधिकारियों को पहले से थी। क्षेत्र के जमादार के माध्यम से भी विभाग को नाले की स्थिति के बारे में बताया गया था, लेकिन इसके बावजूद नाले को दुरुस्त कराने या वहां सुरक्षा व्यवस्था करने की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।

अदालत ने माना- सार्वजनिक सेवा में रही कमी

परिवाद की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्थायी लोक अदालत ने नगर निगम की सार्वजनिक उपयोगिता संबंधी सेवाओं में कमी और त्रुटि मानी। अदालत के अनुसार खुले नाले को सुरक्षित नहीं किया गया और आवश्यक सुरक्षात्मक इंतजाम नहीं होने के कारण हादसा हुआ, जिसमें पोकरराम की जान चली गई।

परिजनों की ओर से प्रत्येक वारिस के लिए 10-10 लाख रुपए मुआवजे की मांग की गई थी। अदालत ने अब नगर निगम को कुल 3 लाख रुपए देने के आदेश दिए हैं। आदेश के अनुसार रुकमा देवी जाट, प्रियंका जाट और महिमा जाट को एक-एक लाख रुपए मिलेंगे। इसके अलावा 10 हजार रुपए परिवाद व्यय के रूप में अलग से देने होंगे।

20 से 25 हजार रुपए प्रतिमाह कमाते थे पोकरराम

परिजनों ने परिवाद में बताया कि पोकरराम जाट परिवार की आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे और करीब 20 से 25 हजार रुपए प्रतिमाह कमाते थे। उनका कहना था कि यदि खुले नाले को समय रहते ठीक कर दिया जाता अथवा दुर्घटना की आशंका को देखते हुए वहां सुरक्षा संकेत लगाए जाते तो यह हादसा टाला जा सकता था।

अदालत के आदेश के बाद अब नगर निगम को मृतक के वारिसों को निर्धारित मुआवजा राशि के साथ ब्याज और परिवाद व्यय का भुगतान करना होगा।



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