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ईरान-अमेरिका तनाव की आंच बीकानेर तक: संकट में दुनिया का मशहूर स्वाद, भुजिया-पापड़ निर्यात पर लगा ‘ब्रेक’

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आपणी हथाई ​बीकानेर न्यूज,  पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के बादलों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को तो हिलाया ही है, लेकिन इसका एक बड़ा और कड़वा असर राजस्थान के बीकानेर की ‘चटपटी’ दुनिया पर भी पड़ा है। विश्व प्रसिद्ध बीकानेरी भुजिया, पापड़ और मसालों का स्वाद अब विदेशी बाजारों तक पहुंचना न केवल महंगा हो गया है, बल्कि सप्लाई चेन टूटने से करोड़ों का कारोबार अधर में लटक गया है।

दोगुना हुआ समय, माल ढुलाई ने बिगाड़ा बजट
​युद्ध के कारण सबसे बड़ी चुनौती समुद्री रास्तों को लेकर खड़ी हो गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण जहाजों को लंबे और सुरक्षित रास्तों का चुनाव करना पड़ रहा है। निर्यातकों के अनुसार ​जो शिपमेंट पहले 30 दिनों में पहुंच जाता था, उसे अब 60 दिन लग रहे हैं। वही ​कंटेनरों की कमी और रूट बदलने से माल ढुलाई (freight cost) में भारी इजाफा हुआ है। ​बीकानेर से हर महीने निर्यात होने वाले करीब 80-100 कंटेनरों की आवाजाही पर ब्रेक लग गया है।

कच्चे माल की कीमतों में लगी आग
​युद्ध का असर केवल निर्यात पर ही नहीं, बल्कि उत्पादन लागत पर भी पड़ रहा है। एक प्रतिष्ठित नमकीन व्यापारी अनुसार, पिछले एक महीने में ही खाद्य तेल की कीमतों में 20% तक का उछाल आया है। इसके साथ ही पेट्रोलियम की बढ़ती कीमतों के कारण पैकेजिंग मटेरियल 30-40% महंगा हो गया है। वही ताड़ का तेल (Palm Oil) और सोयाबीन जैसे कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित होने से निर्माताओं पर वित्तीय बोझ बढ़ गया है। निर्यातक राजेश जिंदल के अनुसार, माल के फंसने और पेमेंट अटकने से व्यापारियों के सामने नकदी का संकट खड़ा हो गया है।

ग्लोबल मार्केट में बीकानेर की साख पर संकट
​बीकानेर का स्वाद केवल भारत ही नहीं, बल्कि अरब देशों और यूरोप में भी सिर चढ़कर बोलता है। वर्तमान में यूएई, ओमान, कतर, बहरीन जैसे खाड़ी देशों के साथ-साथ ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन जैसे यूरोपीय देशों में बीकानेरी स्नैक्स की भारी डिमांड है। लेकिन युद्ध लंबा खिंचने के कारण सप्लाई चेन में आई रुकावट ने इन बाजारों में बीकानेर की पकड़ को कमजोर करने का डर पैदा कर दिया है।

​”मांग तो बाजार में आज भी मजबूत है, लेकिन जब माल समय पर पहुंचेगा ही नहीं और लागत दोगुनी हो जाएगी, तो प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा। बंदरगाहों पर करोड़ों का माल अटका हुआ है।” – बीकानेर के निर्यातक

ताजा अपडेट: क्या हैं मौजूदा हालात?
​हालिया अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के अनुसार, रेड सी (लाल सागर) और आस-पास के क्षेत्रों में बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) बढ़ गया है, जिससे छोटे व्यापारियों का मुनाफा खत्म होने की कगार पर है। अगर यह तनाव जल्द शांत नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में स्थानीय बाजारों में भी नमकीन और पापड़ की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा सकती है।



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