


आपणी हथाई न्यूज, गुरुवार को चिकित्सा मंत्री किडनी फेल प्रसूताओं के हाल चाल जानने और पीबीएम की व्यवस्थाओं समीक्षा करने बीकानेर दौरे पर रहे। इस दौरान कलेक्टर परिसर में पत्रकारों से प्रेस वार्ता भी की। बीकानेर में किडनी फेल प्रसूताओ महिलाओं को लेकर चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर की कथित टिप्पणी के बाद राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। महिलाओं के सम्मान और संवेदनशील मुद्दों पर गंभीरता दिखाने का दावा करने वाली सरकार अब विपक्ष के निशाने पर आ गई है।
प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री द्वारा मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ सुरेंद्र वर्मा से यह पूछना कि “प्रसूता महिलाएं पीबीएम आईसीयू तक नाचते हुए आई थीं या पैदल चलकर”, अब विवाद का बड़ा कारण बन सकता है। गंभीर हालत में अस्पताल पहुंची महिलाओं की पीड़ा को इस प्रकार के शब्दों में प्रस्तुत करना न केवल असंवेदनशील है, बल्कि महिलाओं के सम्मान को भी ठेस पहुंचाने वाला था।
प्रेस वार्ता के दौरान जब पत्रकारों ने मंत्री के बयान पर सवाल उठाए तो उन्होंने सीधे जवाब देने से बचते हुए पूरा मामला मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर मोड़ दिया। वहीं चिकित्सा शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों की सफाई भी विवाद को शांत नहीं कर सकी। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि सत्ता के जिम्मेदार पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों की भाषा और व्यवहार में संवेदनशीलता होनी चाहिए, विशेषकर तब जब मामला महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा हो।
मेडिकल प्राचार्य क्यों बोलें ‘मैं रहूं या ना रहू…
इसी प्रेस वार्ता के दौरान मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा का एक बयान भी चर्चा का विषय बन गया, जिसमें उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि “मैं इस पद पर रहूं या नहीं रहूं…।” इस बयान के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था, सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है और क्या मंत्री अपने बयान पर सफाई या खेद व्यक्त करेंगे ?


