

आपणी हथाई न्यूज, राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर के पावटा जिला अस्पताल से चिंताजनक खबर सामने आई है, जहां ऑपरेशन से प्रसव कराने वाली आठ महिलाओं की हालत अचानक खराब हो गई। इनमें से दो प्रसूताओं की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें तत्काल महात्मा गांधी अस्पताल (एमडीएम) के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। आपकों बता दे कि दो दिन पहले राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर जोधपुर में चिकित्सा सुविधाओं से जुड़े कार्यक्रमों में शिरकत करते दिखाई दिए एयर करीब 5 उदघाटन भी किये, पूरा मेडिकल कॉलेज प्रशासन उनकी हाजरी में खड़ा था मगर किसी ने प्रसूताओं की गंभीर हालत की बात बताने की जहमत नही उठाई।
दो महिलाओं के किडनी और लिवर पर पड़ा असर
जानकारी के अनुसार 20 जून को सिजेरियन ऑपरेशन से प्रसव कराने वाली महिलाओं को कुछ घंटों बाद तेज बुखार और पेट दर्द की शिकायत हुई। जांच में छह महिलाओं में सेप्टीसीमिया यानी रक्त संक्रमण की पुष्टि हुई, जबकि दो महिलाओं की किडनी पर गंभीर प्रभाव पड़ा। इनमें से एक महिला की किडनी प्रभावित हुई है, जबकि दूसरी महिला की किडनी के साथ लिवर भी संक्रमण की चपेट में आ गया। दोनों का आईसीयू में इलाज जारी है।
ऑपरेशन थियेटर बंद, जांच के लिए भेजे गए सैंपल
घटना के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आ गया और एहतियात के तौर पर पावटा जिला अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर को बंद कर दिया गया है। डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बी.एस. जोधा ने बताया कि प्रभावित महिलाओं के ब्लड सैंपल और कल्चर जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही संक्रमण, दवा, उपकरण या अन्य किसी कारण की पुष्टि हो सकेगी।
कोटा और बीकानेर में भी सामने आ चुके हैं गंभीर मामले
राज्य में इससे पहले भी ऐसे मामले चिंता बढ़ा चुके हैं। कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज और जेके लोन अस्पताल में मई माह के दौरान पांच प्रसूताओं की किडनी फेल होने से मौत हो चुकी है। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में इलाज में लापरवाही को प्रमुख कारण बताया था। वहीं बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन के बाद छह महिलाओं की किडनी प्रभावित हुई थी, जिनमें से दो की जान चली गई।
पुराना इतिहास भी डराने वाला
जोधपुर में यह पहली बार नहीं है जब प्रसूताओं की सुरक्षा पर सवाल उठे हों। वर्ष 2011 में उम्मेद अस्पताल में संक्रमण के कारण कई महिलाओं की मौत का मामला सामने आया था। उस घटना के बाद सरकार को प्रभावित परिवारों को मुआवजा देना पड़ा था। अब एक बार फिर सामने आए इस मामले ने अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण और चिकित्सा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


