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बीकानेर : व्यंग्य के बाणों और ठहाकों से सजी राष्ट्रीय कवि चौपाल की 561वीं कड़ी

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आपणी हथाई न्यूज, राष्ट्रीय कवि चौपाल की 561वीं गोष्ठी हास्य-व्यंग्य और विनोद के नाम रही, जहाँ साहित्यकारों ने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज की विसंगतियों पर करारे प्रहार किए। श्री गौरीशंकर ‘मधुकर’ की अध्यक्षता और श्री बुलाकी शर्मा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस साहित्यिक अनुष्ठान में व्यंग्य को वैचारिक क्रांति का आधार बताया गया।

वैचारिक मंथन और व्यंग्य की धार
कार्यक्रम का शुभारंभ रामेश्वर ‘साधक’ द्वारा प्रस्तुत ईश-वंदना से हुआ। उन्होंने अपने बौद्धिक संबोधन में स्पष्ट किया कि सेवा और समर्पण के बिना प्रार्थना भी निष्फल है। मुख्य अतिथि बुलाकी शर्मा ने साहित्य के क्षेत्र में व्यंग्य की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा:

वैचारिक क्रांति को वास्तविक मंथन केवल व्यंग्य ही प्रदान करता है।”

उन्होंने हरीश भादानी और नंद किशोर आचार्य जैसे मनीषियों के जीवन से जुड़े रोचक और प्रेरक संस्मरण भी साझा किए।

काव्य पाठ: राजनीति से बेरोजगारी तक का सफर
मंच पर आसीन कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को कभी गुदगुदाया तो कभी सोचने पर विवश कर दिया:

गौरीशंकर ‘मधुकर’: राजनीति के ढोंग और अवसरवादिता पर कटाक्ष करते हुए कहा, “लोग उगते सूरज को जल देते हैं और ढलने पर चल देते हैं।”

राजेंद्र स्वर्णकार: हास्य छंदों और गीतों के माध्यम से ‘शेरांवाली’ की महिमा और हसीन यादों का ताना-बाना बुना।

नरसिंह भाटी ‘निशु’: अपने विशिष्ट अंदाज में पारिवारिक रिश्तों पर चुटीले संवाद पेश किए।

शिव दाधीच: बेरोजगारी की विडंबना को उजागर करते हुए बंकट बिहारी की कविता पढ़ी— “फांसी चढ़ा तो क्या, जेल में पेट भी तो भरूँगा।”

विविध स्वर और सामाजिक सरोकार
गोष्ठी में बाबू ‘बमचकरी’ ने अपने चिर-परिचित अंदाज में संचालन किया और घाटे-नफे की दार्शनिकता को हास्य में पिरोया। वहीं, पम्मी कोचर ने कवयित्रियों की लेखन सीमाओं पर व्यंग्य किया और कृष्णा वर्मा ने बढ़ती महंगाई पर साइकिल और पेट्रोल के रूपक से कटाक्ष किया। राजकुमार ग्रोवर, सागर सिद्दीकी, के.के. व्यास, और मधुरिमा सिंह सहित 21 रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बाँध दिया।

अंत में, सरदार अली परिहार ने आभार व्यक्त करते हुए साहित्य के प्रति समर्पित रहने का संकल्प दोहराया। इस अवसर पर महेंद्र सिंह चौहान, घनश्याम सोलंकी और किशन लाल सरदाना सहित अनेक साहित्यानुरागी उपस्थित रहे।



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