


आपणी हथाई राजस्थान न्यूज, सरकारी तंत्र में फर्जीवाड़े के खिलाफ राजस्थान स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। प्रदेश भर में फर्जी दिव्यांग (PH) प्रमाण पत्र के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने वाले 44 अभ्यर्थियों के खिलाफ SOG ने धोखाधड़ी और जालसाजी का मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस कार्रवाई ने उन लोगों में हड़कंप मचा दिया है जो गलत तरीके से आरक्षित पदों पर कब्जा जमाए हुए थे। जांच के घेरे में वे डॉक्टर और दलाल भी शामिल हैं, जिन्होंने मिलीभगत कर ये फर्जी प्रमाण पत्र जारी किए थे।
SMS अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट ने खोली पोल
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब संदिग्ध पाए गए इन 44 कर्मचारियों का जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में विशेष मेडिकल बोर्ड के माध्यम से दोबारा परीक्षण कराया गया। जांच रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि इन सभी कर्मचारियों की दिव्यांगता का स्तर निर्धारित मानक 40% से काफी कम पाया गया। इनमें से कई ने श्रवण बाधित (सुनने में अक्षम), लोकोमोटर और दृष्टिबाधित होने के झूठे प्रमाण पत्र बनवा रखे थे।
शिकायतों और मीडिया की सजगता से हुई कार्रवाई
इस घोटाले की जड़ें 2025 में दैनिक भास्कर द्वारा प्रकाशित एक खबर से जुड़ी हैं, जिसमें आबूरोड और आसपास के इलाकों में फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए नौकरी पाने और आवेदन करने के मामले को उजागर किया गया था। इसके बाद, सिरोही कलेक्टर अल्प चौधरी ने सीएमएचओ के निर्देशन में एक टीम का गठन किया और कार्रवाई के लिए एसओजी जयपुर को पत्र लिखा। एसओजी मुख्यालय को हेल्पलाइन और डाक के जरिए कुल 27 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनकी गहराई से जांच करने के बाद इन 44 नामों पर मुहर लगी।
दोषी डॉक्टरों और दलालों पर भी शिकंजा
SOG ने आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत केस दर्ज किया है। प्राथमिकी में केवल नौकरी पाने वाले ही नहीं, बल्कि फर्जीवाड़ा करने वाले दलाल ‘इरफान’ और संदिग्ध डॉक्टर (डॉ. रामलाल, डॉ. शंकर लाल मीणा, डॉ. प्रकाश कुमार वर्मा) के नाम भी शामिल हैं। इन 44 कर्मचारियों में सिरोही के 6 कर्मचारी, बाड़मेर, मकराना, जयपुर, बांसवाड़ा, भरतपुर, जैसलमेर और बीकानेर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के निवासी शामिल हैं।
सिरोही/आबूरोड: सत्यपाल सिंह, हेमंत सिंह, पवन सिंह, मोहित सिंह, प्रशांत सिंह।
अन्य जिले: जयपुर के हन्टू गुर्जर व महेश कुमार, बाड़मेर के तगाराम व दिनेश कुमार, भरतपुर के पिंकी कुमारी व मनीष कटारा, और बीकानेर के संजय।
डॉक्टर: डॉ. रामलाल मीणा, डॉ. शंकर लाल मीणा और डॉ. प्रकाश कुमार वर्मा।SOG की इस कार्रवाई ने स्पष्ट संदेश दिया है कि योग्यता के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।


