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Rising Rajasthan : MoU को धरातल पर उतारने के लिए मुख्य सचिव ने की उच्च स्तरीय समीक्षा, दिए त्वरित निस्तारण के निर्देश

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जयपुर, 16 जून 2026। राजस्थान को देश का एक प्रमुख औद्योगिक और निवेश हब बनाने के उद्देश्य से आयोजित ‘राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’ के तहत किए गए निवेश करारों (MoU) को अब तेज गति से धरातल पर उतारने की प्रशासनिक कवायद शुरू हो गई है। निवेशकों का विश्वास जीतने और राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए राज्य सरकार ‘जीरो पेंडेंसी’ (Zero Pendency) की नीति पर काम कर रही है।

इसी कड़ी में मंगलवार को शासन सचिवालय में मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय मैराथन बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में समिट के दौरान हुए हजारों निवेश प्रस्तावों में से चयनित 27 सबसे महत्वपूर्ण और बड़े एमओयू की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई।

राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेम चेंजर’ हैं ये MoU

‘राइजिंग राजस्थान समिट‘ राज्य के आर्थिक विकास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है, जिसमें देश-विदेश के कई बड़े कॉर्पोरेट घरानों ने नवीकरणीय ऊर्जा (Green Energy), पर्यटन, कृषि प्रसंस्करण, आईटी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कोर सेक्टर्स में भारी निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। इन 27 चयनित एमओयू को राज्य की आर्थिक वृद्धि (Economic Growth) और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही कारण है कि राज्य का शीर्ष प्रशासन इनकी खुद मॉनिटरिंग कर रहा है ताकि निवेशकों को किसी भी तरह की लालफीताशाही (Red Tapism) का सामना न करना पड़े।

भूमि आवंटन और अनुमतियों में न हो कोई देरी बैठक के दौरान मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने स्पष्ट लहजे में कहा कि निवेश प्रस्तावों को केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या तकनीकी बाधा को तत्काल प्रभाव से दूर करने के सख्त निर्देश दिए।

विशेष रूप से भूमि आवंटन और भूमि रूपांतरण (Land Conversion) से जुड़े मामलों को लेकर मुख्य सचिव ने राजस्व विभाग, नगरीय विकास एवं आवासन (UDH) विभाग तथा स्वायत्त शासन विभाग (LSG) को निर्देशित किया कि वे आवश्यक स्वीकृतियों की प्रक्रिया में तेजी लाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि लंबित मामलों का एक निश्चित समय-सीमा के भीतर निस्तारण किया जाए और जो भी नीतिगत निर्णय (Policy Decisions) लिए जाने हैं, वे बिना किसी देरी के लिए जाएं।

जिला कलेक्टरों के साथ जमीनी चुनौतियों पर मंथन चूंकि परियोजनाओं को वास्तविक रूप से जिलों में ही स्थापित होना है, इसलिए बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित जिलों के कलेक्टरों को भी जोड़ा गया था। जिला कलेक्टरों ने जमीनी स्तर पर परियोजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ी स्थानीय समस्याओं, जैसे भूमि अधिग्रहण, बिजली-पानी की सुचारु उपलब्धता और स्थानीय समन्वय की जानकारी दी। मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन और राज्य स्तर के संबंधित विभागों को आपसी समन्वय स्थापित कर इन समस्याओं को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने के निर्देश दिए।

‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से मजबूत होगा इकोसिस्टम बैठक का एक प्रमुख फोकस ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) रहा। मुख्य सचिव ने राज्य में उद्योग और व्यापार की सुगमता के लिए सरकार द्वारा उठाए गए हालिया कदमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम’ (Single Window Clearance System) और ऑनलाइन प्रक्रियाओं जैसे सुधारों ने निवेशकों के लिए राह आसान की है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में हमें अपने सिस्टम को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और निवेशक-अनुकूल (Investor-friendly) बनाना होगा, ताकि राजस्थान में निवेश का एक विश्वस्तरीय इकोसिस्टम विकसित हो सके।

शीर्ष अधिकारियों की रही मौजूदगी इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में निवेश से सीधे तौर पर जुड़े सभी प्रमुख विभागों के शीर्ष अधिकारियों का जमावड़ा रहा। जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अभय कुमार, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री शिखर अग्रवाल, राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव श्री टी. रविकांत, कृषि विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती मंजू राजपाल और ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन (BIP) के आयुक्त श्री नीलाभ सक्सेना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अंत में, यह तय किया गया कि इन एमओयू की निरंतर मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि निवेश के यह प्रस्ताव जल्द से जल्द साकार रूप ले सकें और राज्य की जनता को इसका सीधा आर्थिक लाभ मिल सके।



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