आपणी हथाई न्यूज, राजस्थान के चूरू जिले के सुजानगढ़ क्षेत्र के छोटे से गांव चारियां का रहने वाला एक 12 वर्षीय बच्चा इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा में है। नाम है मोती मेघवाल और पहचान बन चुकी है ‘एलियन स्टार’ के नाम से। कभी अपने चेहरे और खासकर भौंहों की बनावट को लेकर गांव और स्कूल में ताने सुनने वाले मोती ने उसी पहचान को अपनी ताकत बना लिया और आज सोशल मीडिया पर लाखों लोगों तक पहुंच चुके हैं।
मोती सातवीं कक्षा में पढ़ते हैं और उनके माता-पिता खेती करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य है। करीब एक साल पहले मोती ने वीडियो बनाना शुरू किया था। शुरुआत में उनके वीडियो पर ज्यादा ध्यान नहीं गया, लेकिन बाद में उनके संवाद और खास अंदाज ने लोगों का ध्यान खींचना शुरू कर दिया। मोती का एक चर्चित संवाद भी खूब वायरल हुआ, जिसमें वह कहते हैं कि जो लोग पहले कहते थे कि वह कुछ नहीं कर पाएगा, वही अब उसके आगे बढ़ने की बात करते हैं।
मोती की जिंदगी में बड़ा बदलाव 15 अगस्त के आसपास बनाई गई एक वीडियो से आया। इस वीडियो में स्कूल के शिक्षक अच्छे कपड़े पहनकर आने वाले बच्चों को दो लड्डू देने की बात कहते हैं और अगले दिन मोती शेरवानी पहनकर स्कूल पहुंच जाते हैं। यह वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गई और मोती के मुताबिक इसे करीब 18.6 करोड़ बार देखा जा चुका है। इसके अलावा उनका एक और वीडियो करीब 10 करोड़ व्यूज हासिल कर चुका है। उनके कई अन्य वीडियो भी मिलियन में देखे जा रहे हैं।
आज मोती के इंस्टाग्राम पर करीब 19 लाख और फेसबुक पर करीब 11 लाख फॉलोअर्स बताए जा रहे हैं। उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई है कि अलग-अलग राज्यों से लोग चारियां गांव पहुंचकर उनसे मुलाकात और सेल्फी करने लगे हैं। मोती के पिता निंबाराम मेघवाल के अनुसार, पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा और इंदौर समेत कई स्थानों से लोग उनसे मिलने पहुंच रहे हैं। मोती के वीडियो बनाने में उनके ताऊ के बेटे मुकेश भी मदद करते हैं और शूटिंग के लिए किसी बड़े स्टूडियो या महंगे संसाधनों की जरूरत नहीं पड़ती।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस ‘एलियन’ शब्द से कभी मोती को चिढ़ाया जाता था, वही आज उनकी सोशल मीडिया पहचान बन चुका है। मोती खुद कहते हैं कि पहले इस नाम से उन्हें बुरा लगता था, लेकिन अब लोग प्यार से ‘एलियन स्टार’ कहते हैं तो उन्हें अच्छा लगता है। वे आगे पढ़ाई जारी रखने के साथ वीडियो बनाने और बड़े होकर हीरो बनने का सपना भी देखते हैं। उनकी कहानी इस बात की मिसाल बन गई है कि किसी बच्चे की अलग पहचान का मजाक उड़ाने के बजाय उसकी प्रतिभा और आत्मविश्वास को प्रोत्साहित किया जाए।


