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Bikaner संभाग : 2003 का मामला एक बार फिर चुनावों में बटोर रहा सुर्खिया, विधायक सहित इन लोगों पर एफआईआर

Bikaner संभाग आपणी हथाई न्यूज, बीकानेर संभाग के हनुमानगढ़ से जुड़ा जमीन के पट्टों का पुराना मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। हनुमानगढ़ जंक्शन थाने में वर्ष 2003 में सरकारी जमीन पर कथित रूप से आवासीय पट्टे जारी किए जाने को लेकर वर्तमान निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल, तत्कालीन चेयरपर्सन संतोष बंसल, तत्कालीन अधिशाषी अधिकारी भंवरलाल सोनी समेत संबंधित पट्टाधारकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस मामले में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

मामले की शुरुआत आरटीआई कार्यकर्ता संदीप सोनी की ओर से 17 सितंबर को हनुमानगढ़ जंक्शन थाने में दी गई शिकायत से बताई गई है। शिकायत में हनुमानगढ़ जंक्शन की सेक्टर 9-एल कॉलोनी की जमीन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत के मुताबिक इस कॉलोनी की योजना वर्ष 1965 में डिप्टी प्लानर, बीकानेर द्वारा तैयार की गई थी और जमीन राजस्व रिकॉर्ड में मंडी विकास समिति, हनुमानगढ़ के नाम दर्ज बताई गई है। यहां कुल 170 प्लॉट निर्धारित किए गए थे, जिनमें से 70 प्लॉटों का विक्रय होने तथा शेष 100 प्लॉटों के अलावा सड़क, पार्क और स्कूल के लिए छोड़ी गई जमीन के खाली रहने का दावा शिकायत में किया गया है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि बाद में खाली जमीनों पर कथित रूप से अतिक्रमण हुआ और वर्ष 2003 में तत्कालीन नगर परिषद पदाधिकारियों के स्तर पर इन कब्जाधारियों को आवासीय पट्टे जारी किए गए। एफआईआर से संबंधित रिपोर्टों में दो अलग-अलग पट्टाधारकों—राजरानी पत्नी मुलकराज और कृष्णा रानी पत्नी ओमप्रकाश—से जुड़े मामलों का भी उल्लेख सामने आया है। पुलिस ने इन शिकायतों के आधार पर धोखाधड़ी, कूटरचना और साजिश सहित विभिन्न आरोपों के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की है।

मामले में विधायक गणेशराज बंसल का नाम शामिल होने के कारण जांच को लेकर भी विशेष प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पुलिस के अनुसार प्रकरण का अनुसंधान विभागीय प्रावधानों के तहत सीआईडी-सीबी को सौंपे जाने की प्रक्रिया की जाएगी तथा मूल रिपोर्ट और एफआईआर की प्रति उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। हालांकि, एफआईआर में दर्ज आरोप अभी आरोप मात्र हैं और उनकी वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। किसी भी आरोपी के खिलाफ दोष सिद्ध होना और प्राथमिकी दर्ज होना दो अलग-अलग कानूनी अवस्थाएं हैं।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब हनुमानगढ़ नगर परिषद के सभापति चुनाव को लेकर स्थानीय राजनीति में भी गतिविधियां तेज हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार नगर परिषद के 60 वार्डों के समीकरणों को लेकर विभिन्न राजनीतिक गुट अपने-अपने दावे कर रहे हैं और 21 सितंबर को होने वाले सभापति चुनाव को लेकर भी राजनीतिक हलचल जारी है। ऐसे में एफआईआर दर्ज होने की खबर ने स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

 

 



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